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बिहार में दाखिल-खारिज नियम सख्त, सरकारी जमीन की होगी जांच

Bihar land mutation rules

पटना: बिहार सरकार ने दाखिल-खारिज प्रक्रिया को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब हर मामले में जमीन का सरकारी अभिलेखों से मिलान करना अनिवार्य होगा। यानी किसी भी जमीन का नामांतरण करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वह सरकारी जमीन नहीं है। इस कदम का उद्देश्य फर्जी दावों और गलत जमाबंदी को रोकना है।

सरकारी रिकॉर्ड से मिलान के बाद ही मंजूरी

सरकार के अनुसार अब बिहार भूमि पोर्टल पर उपलब्ध सरकारी जमीन की सूची से मिलान करने के बाद ही दाखिल-खारिज के आवेदन को मंजूरी दी जाएगी। इससे जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। साथ ही सरकार ने जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने का भी प्रयास किया है, जिससे विकास कार्यों को गति मिल सके।

नए नियमों में अधिकारों का बंटवारा

नए प्रावधानों के तहत अब जिलाधिकारी 10 एकड़ तक सरकारी या गैरमजरूआ आम जमीन का निःशुल्क हस्तांतरण कर सकेंगे। 10 से 20 एकड़ तक के मामलों में यह अधिकार प्रमंडलीय आयुक्त को दिया गया है, जबकि 20 एकड़ से अधिक जमीन के हस्तांतरण के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी आवश्यक होगी। यह बदलाव पुराने नियमों में संशोधन कर लागू किया गया है।

लंबित मामलों को 15 दिन में निपटाने का आदेश

राज्य सरकार ने लंबित दाखिल-खारिज मामलों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने निर्देश दिया है कि राज्यभर में लंबित करीब 3.10 लाख आवेदनों को अधिकतम 15 दिनों के भीतर निपटाया जाए। इसके लिए रोजाना निगरानी की व्यवस्था भी लागू की जाएगी।

लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

सरकार ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के बाद कार्यों की समीक्षा की जाएगी। यदि लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि दाखिल-खारिज प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाना उसकी प्राथमिकता है, ताकि आम लोगों को जमीन से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

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