पटना: आज के दौर में अगर कोई फसल सचमुच में ‘ग्रीन गोल्ड’ यानी हरा सोना कहलाने लायक है, तो वह बांस की खेती है। यह सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण स्तर पर नए उद्योग खड़े करने का मजबूत आधार बन रहा है। इन्हीं संभावनाओं को देखते हुए बिहार में बांस की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार की ओर से राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत किसानों को बांस लगाने पर भारी सब्सिडी दी जा रही है, जिससे खेती की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।
राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत कितनी मिलेगी सब्सिडी
बिहार कृषि विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के अंतर्गत यदि किसान एक हेक्टेयर क्षेत्र में बांस की खेती करते हैं तो लगभग 1.20 लाख रुपये की लागत आती है। इस पर राज्य सरकार 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान कर रही है। यानी किसानों को बांस की खेती के लिए 60 हजार रुपये की सीधी आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ बांस जैसी व्यावसायिक फसल अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
27 जिलों में लागू होगी योजना
यह योजना बिहार के 27 जिलों में लागू की जा रही है। इनमें अररिया, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, जमुई, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, सारण, शिवहर, शेखपुरा, सीतामढ़ी, सिवान, सुपौल, वैशाली और पश्चिम चंपारण शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इन जिलों में बड़े पैमाने पर बांस की खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय में स्थायी बढ़ोतरी की जाए।
कौन किसान उठा सकते हैं योजना का लाभ
- राष्ट्रीय बांस मिशन का लाभ पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा।
- एक ही परिवार में पति और पत्नी दोनों इस योजना का लाभ ले सकते हैं, बशर्ते उनके नाम पर अलग-अलग भूमि और भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र हों।
- घने बांस की खेती के लिए न्यूनतम 0.04 हेक्टेयर और अधिकतम 0.20 हेक्टेयर भूमि निर्धारित की गई है।
- खेत की मेड़ पर बांस लगाने के लिए हर किसान को कम से कम 10 पौधे लगाने होंगे। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी योजना का लाभ मिल सकेगा।
आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन
इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक किसान बिहार उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट पर राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के लिंक पर क्लिक कर आवश्यक जानकारी भरनी होगी और दस्तावेज अपलोड करने होंगे। आवेदन के बाद जिला स्तर पर जांच की जाएगी और पात्र पाए जाने पर ही किसानों को सब्सिडी की राशि दी जाएगी।
बांस की खेती क्यों है किसानों के लिए फायदेमंद
बांस की खेती में न तो अधिक खाद की जरूरत होती है और न ही ज्यादा सिंचाई की। यह फसल प्रतिकूल मौसम को भी सहन कर लेती है और बंजर या कम उपजाऊ जमीन पर भी अच्छी तरह उगाई जा सकती है। बांस 3 से 5 साल में तैयार हो जाता है और इसके बाद कई वर्षों तक लगातार उत्पादन देता है। निर्माण, फर्नीचर, कागज, हस्तशिल्प और अन्य उद्योगों में इसकी भारी मांग होने के कारण बाजार में इसका अच्छा मूल्य मिलता है। कुल मिलाकर, बिहार सरकार की यह पहल किसानों के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया बन सकती है। सही जानकारी और समय पर आवेदन कर किसान बांस की खेती को अपनाकर लंबे समय तक स्थायी मुनाफा कमा सकते हैं।
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