डॉ. एस. के. सिंह:
प्रोफेसर (डॉ.) संजय कुमार सिंह देश के प्रतिष्ठित पादप रोग वैज्ञानिकों में शामिल हैं और वर्तमान में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर, बिहार के स्नातकोत्तर पादप रोग विज्ञान एवं सूत्रकृमि विज्ञान विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे केला अनुसंधान केंद्र, गोरौल, वैशाली के प्रमुख/प्रभारी (अतिरिक्त प्रभार) का दायित्व भी संभाल रहे हैं। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से पादप रोग विज्ञान में पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की है और वर्ष 2009 से प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उनकी प्रमुख विशेषज्ञता फल रोग विज्ञान, विशेषकर केला एवं पपीता के रोगों की पहचान, रोग-कारक विज्ञान तथा पर्यावरण-अनुकूल एवं समेकित रोग प्रबंधन में है।
आईसीएआर की अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (फल) से उनका 25 वर्षों से अधिक का शोध अनुभव जुड़ा रहा है। इसमें उन्होंने लगभग 15 वर्षों तक सह-प्रधान अन्वेषक और लगभग एक दशक तक प्रधान अन्वेषक के रूप में कार्य किया। वे आईसीएआर–केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर तथा अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना–शुष्क क्षेत्रीय फल के वर्ष 2017–2022 के अनुसंधान कार्यक्रम की समीक्षा करने वाली पंचवर्षीय समीक्षा समिति (QRT) के सदस्य भी रहे हैं।
डॉ. सिंह ने विश्वविद्यालय में सह निदेशक अनुसंधान सहित अनेक महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं अनुसंधान प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन किया है। उनके नेतृत्व एवं सहभागिता में फल रोग विज्ञान से संबंधित अनेक प्रौद्योगिकियाँ विकसित हुई हैं, जिन्हें विश्वविद्यालय एवं आईसीएआर प्रणाली के माध्यम से किसानों तक पहुँचाया गया है। वर्तमान में उनके प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों में केले के विनाशकारी फ्यूजेरियम विल्ट ट्रॉपिकल रेस-4 (Foc TR4) का जैविक एवं समेकित प्रबंधन, पपीते की जड़-सड़न का होलोबायोम-आधारित प्रबंधन, लाभकारी सूक्ष्मजीवों एवं जैव-नियंत्रकों का उपयोग तथा टिकाऊ फल उत्पादन प्रमुख हैं।
उन्होंने 75 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं तथा 15 से अधिक पुस्तकों, तकनीकी पुस्तिकाओं, प्रशिक्षण मैनुअल और बुलेटिनों के लेखन एवं संपादन में योगदान दिया है। पादप रोग विज्ञान और फल अनुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान को विभिन्न वैज्ञानिक संस्थाओं ने सम्मानित किया है; वे फेलो, फाइटोपैथोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (FPSI) तथा फेलो, कॉन्फेडरेशन ऑफ हॉर्टिकल्चर एसोसिएशन्स ऑफ इंडिया (CHAI) से भी सम्मानित हैं।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंचों पर व्याख्यान, तकनीकी सत्रों और किसान-केंद्रित प्रसार गतिविधियों में सक्रिय डॉ. सिंह का वर्तमान शोध विशेष रूप से रसायनों पर निर्भरता कम करने, जैविक एवं सूक्ष्मजीव-आधारित रोग प्रबंधन, जलवायु-सहिष्णु बागवानी और किसानों की आय एवं आजीविका सुधारने पर केंद्रित है। शोध, शिक्षण और कृषि प्रसार के समन्वय के माध्यम से वे वैज्ञानिक ज्ञान को खेत तक पहुँचाने और भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
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