नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली स्थित पूसा कैंपस के भारत रत्न सी. सुब्रह्मण्यम ऑडिटोरियम में कृषि खरीफ अभियान 2025 पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देशभर के 10 से अधिक राज्यों के कृषि मंत्रियों ने शिरकत की, जबकि अन्य ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर कृषि क्षेत्र की उन्नति के लिए केंद्र के साथ मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी कृषि मंत्रियों और अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा, “भारत की 145 करोड़ जनता के लिए पर्याप्त खाद्यान्न, फल और सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना हमारी बड़ी जिम्मेदारी है। यह असाधारण कार्य है, जिसे हमें मिलकर पूरा करना होगा।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की भी सराहना की और कहा, “हमारा संकल्प है कि आतंकवाद का जड़ से खात्मा करके ही चैन की सांस लेंगे।”
चौहान ने भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में चौथे स्थान पर पहुंचने की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा, “भारत अद्भुत देश है। एक साथ कई मोर्चों पर काम चल रहा है। कल्याणकारी योजनाओं के लिए भी काम चल रहा है, आज खरीफ सम्मेलन चल रहा है, कल प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई, और वहीं दूसरी ओर आतंकवादियों के विनाश का महाभियान भी चालू है।”
सिंधु जल संधि को लेकर उन्होंने कहा, “1960 में जो सिंधु जल संधि हुई थी, वह ऐतिहासिक गलती थी। हमारे देश से बहने वाली नदियों का 80 प्रतिशत पानी पाकिस्तान को दे दिया गया। पहलगाम आतंकी घटना के बाद सिंधु जल समझौता रद्द कर दिया गया है। सिंधु नदी के पानी पर हमारे किसानों का हक है, एक-एक बूंद का उपयोग खेती, बिजली और विकास में करेंगे।”
कृषि क्षेत्र में नवाचारों की दिशा में उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों ने 2014 के बाद 2,900 नई किस्मों का विकास किया है। इनमें से दो नई चावल की किस्में विकसित की गई हैं, जो उत्पादन बढ़ाएंगी, फसल 20 दिन पहले तैयार होगी, पानी की बचत होगी, और मीथेन गैस का उत्सर्जन कम होगा। ये किस्में जल्द ही किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी।
“विकसित भारत संकल्प अभियान” के तहत 16,000 वैज्ञानिकों की टीमें बनाई जाएंगी, जो गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगी। ये टीमें साल में दो बार, अक्टूबर में रबी फसल के लिए और मई में खरीफ फसल के लिए, अभियान चलाएंगी।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री राम नाथ ठाकुर, कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, सचिव (उर्वरक) रजत कुमार मिश्रा, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, डीडीजी (कृषि प्रसार) डॉ. राजबीर सिंह, डीडीजी (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव, मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक राहुल सक्सेना, और कृषि मंत्रालय की संयुक्त सचिव पेरिन देवी ने भी अपने विचार साझा किए। कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की और राज्यों के साथ समन्वय और तालमेल के साथ काम करने की आवश्यकता पर बल दिया।
यह सम्मेलन कृषि क्षेत्र में नवाचार, समन्वय और किसानों की भलाई के लिए केंद्र और राज्यों के बीच साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।
