कृषि समाचार

ई-नाम से बढ़ा किसानों का व्यापार, ऑनलाइन बिक्री को मिली नई रफ्तार

E-NAM boosts farmers' trade, online sales gain momentum

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026: किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और कृषि विपणन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया राष्ट्रीय कृषि बाजार मंच (ई-नाम) लगातार विस्तार कर रहा है। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से किसान अब केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों के खरीदारों को भी अपनी उपज ऑनलाइन बेच सकते हैं। इससे किसानों को प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए बेहतर मूल्य मिलने के साथ बिक्री की राशि सीधे बैंक खाते में प्राप्त करने की सुविधा भी मिल रही है। सरकार ने मंगलवार को संसद में इस मंच से जुड़े ताजा आंकड़े और उपलब्धियां साझा कीं।

किसानों की तुलना में व्यापारियों का पंजीकरण कम

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि 30 जून 2026 तक इस मंच पर 1.89 करोड़ किसानों और 2.78 लाख व्यापारियों का पंजीकरण हो चुका है। हालांकि किसानों की संख्या व्यापारियों की तुलना में काफी अधिक है, लेकिन इसके बावजूद मंच के माध्यम से कृषि व्यापार में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

अंतरराज्यीय व्यापार में छह गुना से अधिक बढ़ोतरी

सरकार के अनुसार पिछले छह वर्षों में राज्यों के बीच होने वाले कृषि व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2018-19 में ई-नाम के माध्यम से 563 मीट्रिक टन कृषि उपज का व्यापार हुआ था, जिसका मूल्य 37 लाख रुपये था। वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 2,984.3 मीट्रिक टन और 14.28 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अब तक राज्यों के बीच कुल 28,566 मीट्रिक टन कृषि उपज का लगभग 83.95 करोड़ रुपये का व्यापार इस मंच के जरिए किया जा चुका है।

डिजिटल व्यवस्था से किसानों को मिल रही नई सुविधाएं

सरकार का कहना है कि ई-नाम देशभर की कृषि उपज मंडियों को एक डिजिटल व्यवस्था से जोड़ता है। इसके माध्यम से किसान अपनी उपज की ऑनलाइन बोली लगा सकते हैं, बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं और बिक्री की पूरी राशि सीधे अपने बैंक खाते में हासिल कर सकते हैं। साथ ही विभिन्न राज्यों के खरीदार भी ऑनलाइन बोली प्रक्रिया में भाग लेकर कृषि व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं।

किसान उत्पादक संगठनों को मिला बढ़ावा

किसानों की सामूहिक ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से देशभर में 10,000 किसान उत्पादक संगठनों के गठन का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। इन संगठनों के माध्यम से किसान अपनी उपज को सामूहिक रूप से बाजार तक पहुंचाकर बेहतर सौदेबाजी कर रहे हैं। वर्ष 2020 में योजना शुरू होने के बाद से इन संगठनों का कुल कारोबार 20,340 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

भंडारण और विपणन सुविधाओं का हुआ विस्तार

फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने भंडारण और विपणन अवसंरचना के विकास पर भी जोर दिया है। पिछले दस वर्षों में कृषि विपणन अवसंरचना योजना के तहत 369.18 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले 12,353 भंडारण परियोजनाओं तथा 6,901 अन्य कृषि अवसंरचना परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है।

गोदाम, शीतगृह और प्रसंस्करण इकाइयों को मिली सहायता

कृषि अवसंरचना कोष के माध्यम से किसानों और कृषि कारोबार से जुड़े हितधारकों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके तहत देशभर में 18,893 गोदाम, 3,110 शीतगृह और 2,105 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को सहायता दी गई है। वहीं बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत फल और सब्जियों के संरक्षण के लिए लगभग 1.76 लाख आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। इनमें पैक हाउस, शीतगृह, शीतित परिवहन वाहन, फल पकाने की इकाइयां और फसल को सुरक्षित रखने वाली अन्य आधुनिक व्यवस्थाएं शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन प्रयासों से किसानों की उपज को सुरक्षित रखने, नुकसान कम करने और बेहतर मूल्य दिलाने में मदद मिल रही है।

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