नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने प्याज खरीद को बढ़ावा देने के लिए गुणवत्ता मानकों में ढील देने का बड़ा फैसला लिया है। इस कदम के तहत राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ के माध्यम से होने वाली खरीद में अब अधिक लचीलापन बरता जाएगा, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी। सरकार ने यह निर्णय तब लिया, जब निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले प्याज की खरीद अपेक्षा से कम रही। हाल के आंकड़ों के अनुसार तय लक्ष्य के मुकाबले कम मात्रा में ही प्याज की खरीद हो सकी थी, जिससे एजेंसियों और किसानों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
गुणवत्ता मानकों में किया गया बदलाव
नई व्यवस्था के तहत प्याज के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों में बदलाव किया गया है। पहले जहां प्याज के कंद की मोटाई के लिए सख्त सीमा तय थी, अब उसे बढ़ाकर अधिक लचीला बना दिया गया है। इससे पहले जिन प्याजों को मानकों के कारण अस्वीकार कर दिया जाता था, अब वे भी खरीद के दायरे में आ सकेंगे। इसके साथ ही एक नई श्रेणी भी बनाई गई है, जिसके अंतर्गत ऐसे प्याज शामिल किए जाएंगे जिनकी बाहरी सतह पर कुछ दाग या रंग में बदलाव हो सकता है। इससे किसानों को अपनी अधिक उपज बेचने का अवसर मिलेगा।
खरीद प्रक्रिया होगी तेज
सरकार का मानना है कि इन बदलावों से खरीद प्रक्रिया तेज होगी और भंडारण क्षमता से समझौता किए बिना अधिक मात्रा में प्याज की खरीद संभव हो सकेगी। इससे बाजार में आपूर्ति भी बेहतर बनी रहेगी और कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
नासिक के किसानों को मिलेगा लाभ
इस फैसले का सबसे अधिक लाभ नासिक क्षेत्र के किसानों को मिलने की उम्मीद है, जहां बड़ी मात्रा में प्याज का उत्पादन होता है। अब उन किसानों की उपज भी खरीदी जा सकेगी, जो पहले गुणवत्ता मानकों के कारण बिक्री से वंचित रह जाते थे। इसके अलावा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त खरीद केंद्र खोलने की अनुमति भी दी है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
किसानों के लिए राहत भरा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला किसानों के लिए राहत भरा साबित होगा। इससे न केवल उनकी आय में सुधार होगा, बल्कि बाजार में प्याज की उपलब्धता भी बेहतर बनी रहेगी। गुणवत्ता मानकों में ढील देकर सरकार ने किसानों के हितों को प्राथमिकता दी है और कृषि बाजार को संतुलित बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
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