कृषि समाचार

गन्ना नियंत्रण आदेश के खिलाफ मेरठ में जय किसान आंदोलन का शंखनाद

Sugarcane control farmers protest meerut

मेरठ: उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के हितों पर मंडराते संकट को देखते हुए जय किसान आंदोलन ने सरकार के नए ‘गन्ना नियंत्रण आदेश 2026’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के व्यावसायिक अध्ययन संस्थान में आयोजित एक राज्य स्तरीय संवाद के दौरान कृषि विशेषज्ञों और किसान नेताओं ने इस नए कानून को किसान विरोधी करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

किसानों को मिल मालिकों का ‘बंधुआ मजदूर’ बनाने की साजिश

संवाद में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल जय किसान आंदोलन के संस्थापक योगेंद्र यादव ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सुधार के नाम पर पेश किया गया यह नया आदेश वास्तव में किसानों के साथ एक बड़ा धोखा है। यादव के अनुसार, इस कानून के प्रावधानों को इस तरह तैयार किया गया है जिससे गन्ना किसान पूरी तरह से मिल मालिकों के रहमों-करम पर निर्भर हो जाएंगे, जो उन्हें बंधुआ मजदूरी की ओर धकेलेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि वे इस ‘काले कानून’ के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए गांव-गांव जाकर आंदोलन को और तेज करेंगे।

भुगतान में देरी और ब्याज दरों में कटौती पर गहरी चिंता

संवाद के दौरान विशेषज्ञों ने नए कानून की चार प्रमुख विसंगतियों को रेखांकित किया:

  • कॉर्पोरेट घरानों को लाभ: इस आदेश से सहकारी चीनी मिलों के कमजोर होने और निजी मिलों के एकाधिकार बढ़ने का खतरा जताया गया है।
  • भुगतान की समय सीमा: नए आदेश में 14 दिनों के भीतर अनिवार्य भुगतान के नियम को लचीला बनाने के रास्ते खोजे गए हैं, जिससे किसानों का बकाया बढ़ने की आशंका है।
  • ब्याज दरों का नुकसान: गन्ना बकाया पर मिलने वाले ब्याज की दरों में बदलाव किया गया है, जिसे विशेषज्ञों ने मिल मालिकों को फायदा पहुंचाने वाला कदम बताया है।
  • पारदर्शिता का अभाव: गन्ने की रिकवरी मापने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा।

प्रमुख वक्ताओं के विचार

पुष्पेंद्र कुमार की मानें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश का किसान पहले ही लागत और खाद-बीज की मार झेल रहा है, नए नियमों से गन्ने की खेती अब घाटे का सौदा साबित होगी।

बैठक में मनीष भारती ने अपने विचार रखते हुए कहा कि, “विश्वविद्यालय परिसर से उठी यह आवाज पूरे देश में जाएगी और शोध व डेटा के आधार पर यह साबित होगा कि यह आदेश केवल पूंजीपतियों की बैलेंस शीट सुधारने के लिए लाया गया है।”

वरिष्ठ किसान नेता प्रीतम सिंह ने कहा – “इस आदेश में विवाद निपटारे की जो व्यवस्था दी गई है, वह पूरी तरह से नौकरशाही के नियंत्रण में है, जिससे किसानों को अदालतों और दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे।”

तराई किसान संगठन के तेजेन्द्र सिंह विर्क ने सरकार को इस मसौदे पर फिर से विचार करने और किसान संगठनों के साथ बैठकर उनकी आपत्तियों का निराकरण करने की सिफ़ारिश की।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ने वाला फैसला

अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर अतवीर सिंह ने चेतावनी दी कि गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति खराब होने से पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। वहीं, तराई किसान संगठन के तेजेन्द्र सिंह विर्क ने सरकार से आग्रह किया कि इस मसौदे पर किसान संगठनों के साथ बैठकर दोबारा चर्चा की जाए और उनकी आपत्तियों का समाधान किया जाए।

गन्ना नियंत्रण आदेश 2026 को लेकर जय किसान आंदोलन ने अपनी आगामी रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि सरकार इन संशोधनों को वापस नहीं लेती है, तो पूरे उत्तर प्रदेश में तहसील स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे और ‘गन्ना अधिकार यात्रा’ निकाली जाएगी। इस महत्वपूर्ण सभा का संचालन अशोक पंवार द्वारा किया गया।

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