नई दिल्ली: वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के तीन दिवसीय भारत दौरे के दौरान आयोजित राजकीय भोज और सम्मान समारोह में भारत की समृद्ध कृषि, खानपान और कारीगरी विरासत की खास झलक देखने को मिली। इस मौके पर देश के विभिन्न राज्यों से चुने गए पारंपरिक और जीआई टैग प्राप्त व्यंजन परोसे गए, साथ ही विशेष सांस्कृतिक उपहार भी भेंट किए गए।
महाराष्ट्र और बिहार के व्यंजनों की रही खास प्रस्तुति
राजकीय भोज में महाराष्ट्र का प्रसिद्ध रत्नागिरी आम परोसा गया, जिसे अलफांसो या हापुस के नाम से जाना जाता है। अपनी मिठास, सुगंध और गुणवत्ता के कारण यह आम विश्व स्तर पर लोकप्रिय है। इसके साथ ही पोषण से भरपूर मिलेट आधारित उत्पाद भी शामिल किए गए।
बिहार के पारंपरिक व्यंजनों ने भी विशेष स्थान बनाया। नालंदा के सिलाव का खाजा, गया का अनरसा, मिथिला का मखाना और हाजीपुर का मालभोग केला मेन्यू में शामिल रहे। ये सभी उत्पाद राज्य की कृषि परंपरा और स्थानीय पहचान को दर्शाते हैं।
पारंपरिक मिठाइयों और उत्पादों की पहचान
सिलाव खाजा अपनी कुरकुरी परतों और हल्के मीठे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। गया अनरसा चावल और गुड़ से तैयार होने वाली पारंपरिक मिठाई है, जो अपने खास स्वाद के लिए जानी जाती है। मिथिला मखाना पोषण से भरपूर कृषि उत्पाद है, जबकि हाजीपुर का मालभोग केला अपनी मिठास और मुलायम बनावट के लिए मशहूर है।
राष्ट्रपति को दिए गए विशेष सांस्कृतिक उपहार
दौरे के दौरान राष्ट्रपति को भारत की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विशेष उपहार भी दिए गए। इनमें 108 पंखुड़ियों वाला कमल, पीतल से बनी बुद्ध प्रतिमा और वाराणसी की रेशमी वस्त्र कला से तैयार विशेष कपड़ा शामिल रहा। ये उपहार भारतीय परंपरा, आध्यात्मिकता और शिल्प कौशल का प्रतीक हैं।
वैश्विक मंच पर भारतीय विरासत का प्रदर्शन
इस आयोजन के जरिए भारत ने अपनी विविधता, कृषि उत्पादों और पारंपरिक कारीगरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में भी मदद मिलती है।
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