नई दिल्ली: लेटस, जिसे आम बोलचाल में ‘सलाद पत्ता’ कहा जाता है, दुनिया भर में लोकप्रिय सलाद फसल है। पिज्जा, बर्गर, सैंडविच और अन्य फास्ट फूड में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। भारत के बड़े शहरों, होटलों और रेस्टोरेंट में इसकी उपस्थिति बढ़ने के कारण यह किसानों के लिए एक व्यावसायिक और मुनाफे वाली फसल बन गई है। लेटस की कच्ची, पौष्टिक और स्वादिष्ट पत्तियां इसे विशेष रूप से पसंदीदा बनाती हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लेटस की फसल सिर्फ 90 से 100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर एक एकड़ से लगभग 20 टन तक उपज मिल सकती है। बाजार में इसकी अच्छी क्वालिटी 50 से 70 रुपये प्रति किलो बिकती है, जिससे किसान आसानी से 5 से 6 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।
बेहतर किस्में और बुवाई का सही समय
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के अनुसार, लेटस की प्रमुख और उच्च उपज देने वाली किस्मों में ग्रेट ल्यूकस चाइनीज और स्लोवाल्ट शामिल हैं। इसकी खेती के लिए समय का चुनाव बहुत जरूरी है। मैदानी क्षेत्रों में सितंबर से अक्टूबर का समय और पहाड़ी इलाकों में अगस्त से सितंबर का समय बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। पॉलीहाउस या हाइड्रोपोनिक तकनीक से लेटस की खेती पूरे साल की जा सकती है।
खेत की तैयारी और खाद प्रबंधन
अच्छी उपज के लिए खेत की तैयारी महत्वपूर्ण है। मिट्टी को 2-3 बार गहरी जुताई करके पलटें और फिर कल्टीवेटर से 3-4 बार जुताई कर भुरभुरा बनाएं। प्रति एकड़ 15-20 ट्रॉली अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद मिलाएं। रासायनिक उर्वरक के लिए प्रति एकड़ नाइट्रोजन 50 किलोग्राम, फॉस्फेट 25 किलोग्राम, और पोटाश 32 किलोग्राम उपयोग करें। फॉस्फेट और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा खेत की अंतिम तैयारी में डालें। बची हुई नाइट्रोजन को दो बराबर हिस्सों में बांटकर रोपाई के कुछ हफ्तों बाद छिड़काव करें।
नर्सरी और रोपाई की विधि
लेटस के बीज सीधे खेत में बोने की बजाय नर्सरी में पौध तैयार करना बेहतर रहता है। एक एकड़ खेत के लिए 200 से 250 ग्राम बीज पर्याप्त होता है। बीजों को नर्सरी की उठी हुई क्यारियों में बोकर पौध तैयार करें। जब पौधे 5-6 सप्ताह के हो जाएं, उन्हें मुख्य खेत में कतारों में लगाएं। लाइन से लाइन की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 25 सेमी रखें।
पत्तियों की कटाई
फसल बड़ी होने पर मुलायम और ताज़ी पत्तियों को ही तोड़ें। पुरानी पत्तियां सख्त और स्वाद में कम हो जाती हैं। पत्तियों की कटाई 2-3 दिन के अंतराल पर लगातार करें। हाथ या तेज चाकू से सावधानीपूर्वक पत्तियां काटें ताकि पौधे को कोई नुकसान न पहुंचे।
खेती शुरू करने से पहले
लेटस की खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक मुनाफा दे सकती है, लेकिन यह एक विशेष बाजार की फसल है। इसलिए खेती शुरू करने से पहले अपने नज़दीकी बाजार, होटल, रेस्टोरेंट और सुपरमार्केट से बिक्री की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। सही बाजार लिंक होने पर लेटस किसानों के लिए आय का एक उत्कृष्ट स्रोत बन सकती है।
