कृषि समाचार

हिमाचल प्रदेश: डेयरी व बागवानी से जुड़े किसानों के हित में राज्य सरकार ने लिए अहम फैसले

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के किसानों, बागवानों और दूध उत्पादकों के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। प्रदेश सरकार ने 2025 के लिए मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत बी और सी ग्रेड के सेब की खरीद 12 रुपये प्रति किलोग्राम के समर्थन मूल्य पर करने को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, अन्य फलों की खरीद की भी दरें तय की गई हैं। बी और सी ग्रेड के किन्नू, माल्टा और संतरे 12 रुपये प्रति किलो, गलगल 10 रुपये प्रति किलो और सीडलिंग, कलमी व कच्चा अचारी आम भी 12 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदे जाएंगे। यह फैसला उन हजारों बागवानों के लिए राहत की खबर है, जिन्हें हर साल कम कीमतों और निजी खरीददारों की मनमानी से नुकसान उठाना पड़ता था। मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सरकार द्वारा तय न्यूनतम मूल्य अब उन्हें निश्चित आमदनी की गारंटी देगा।

दूध उत्पादकों के लिए नई योजनाएं, मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट्स की स्थापना

कैबिनेट बैठक में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आमदनी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य के विभिन्न हिस्सों में दूध प्रसंस्करण और शीतकरण सुविधाएं स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। नाहन, नालागढ़, मौहल और रोहड़ू में चार नए मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, हमीरपुर जिले के जलाड़ी में एक नया मिल्क चिलिंग सेंटर और ऊना जिले के झलेरा में एक बल्क मिल्क कूलर स्थापित किया जाएगा। इन केंद्रों के संचालन को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश दूध संघ में ERP (उद्यम संसाधन नियोजन) सॉफ्टवेयर प्रणाली लागू की जाएगी। इससे दूध संघ के सभी कामकाज डिजिटल हो जाएंगे और किसान मोबाइल के माध्यम से तुरंत भुगतान और अन्य जानकारियों की ट्रैकिंग कर सकेंगे।

बिलासपुर की 101 पंचायतों में गठित होंगी दूध सहकारी समितियां

बिलासपुर जिला प्रशासन ने दूध उत्पादन को संगठित करने के लिए बड़ी पहल की है। जिले की 101 ग्राम पंचायतों में दूध सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि पहले चरण में 25 पंचायतों को चुना गया है, जहां समिति गठन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही जरूरी लाइसेंस भी जारी कर दिए जाएंगे। पशुपालन विभाग के हालिया सर्वे के अनुसार, इन पंचायतों में रोजाना औसतन 200 लीटर अतिरिक्त दूध का उत्पादन होता है। इस उत्पादन को बाजार तक पहुंचाने के लिए क्लस्टर-स्तरीय दूध संग्रहण केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे, जो चिलिंग पॉइंट्स से जुड़े होंगे। दूसरे चरण में उन पंचायतों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां रोजाना 100 लीटर से अधिक दूध का अधिशेष होता है।

गुजरात जैसे राज्यों का होगा अध्ययन दौरा

सरकार का लक्ष्य सिर्फ दूध संग्रहण और बिक्री ही नहीं, बल्कि डेयरी उत्पादन को एक व्यावसायिक मॉडल के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित करना है। इसके लिए किसानों को गुजरात जैसे अग्रणी राज्यों का दौरा भी करवाया जाएगा, जहां वे सहकारी डेयरी व्यवस्थाओं और अत्याधुनिक तकनीकों का अनुभव कर सकेंगे। हिमाचल प्रदेश सरकार के ये कदम न केवल बागवानी और डेयरी क्षेत्र को मजबूती देंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करेंगे। इससे किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलेगा और राज्य की खाद्य प्रसंस्करण क्षमता में भी इजाफा होगा।

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