सरकारी योजनाएँ

कोल्ड स्टोरेज पर सरकार का ज़ोर, जल्दी खराब होने वाले बागवानी उत्पादों के लिए कई योजनाओं से मिलेगी वित्तीय सहायता

नई दिल्ली: तेजी से नष्ट होने वाली बागवानी उपज के भंडारण को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में कोल्ड स्टोरेज़ ढांचा खड़ा करने की अपनी रणनीति को और गति दी है। मंगलवार को लोकसभा में एक प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि सरकार ने अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से निवेश प्रोत्साहन और सब्सिडी‐सहायता का विस्तृत तंत्र तैयार किया है, ताकि किसानों तथा उद्यमियों को कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने में वित्तीय बोझ का सामना न करना पड़े।

राज्य मंत्री ठाकुर ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का ‘एकीकृत बागवानी विकास मिशन’ (एमआईडीएच) राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की वार्षिक कार्य योजनाओं के अनुसार पाँच हज़ार मीट्रिक टन तक की क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज के निर्माण, विस्तार और आधुनिकीकरण पर सब्सिडी मुहैया कराता है। सामान्य क्षेत्रों में परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तथा पूर्वोत्तर, पहाड़ी व अनुसूचित क्षेत्रों में 50 प्रतिशत सहायता बैक‑एंडेड सब्सिडी के रूप में दी जाती है। योजना पूर्णतः मांग और उद्यमी आधारित है और इसका लाभ किसान, व्यक्तिगत उद्यमी, किसान उत्पादक संगठन, स्वयं सहायता समूह, सहकारी समिति, कंपनियाँ, विपणन संघ, एपीएमसी, स्थानीय निकाय तथा राज्य सरकारें उठा सकती हैं।

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की पूँजी निवेश सब्सिडी योजना के अंतर्गत पाँच हज़ार से बीस हज़ार मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज तथा नियंत्रित वातावरण (सीए) इकाइयों के लिए सामान्य क्षेत्रों में 35 प्रतिशत और विशेष क्षेत्रों में 50 प्रतिशत तक की सहायता प्रदान की जा रही है। बोर्ड की यह योजना भी निर्माण के साथ‑साथ विस्तार और आधुनिकीकरण को समाविष्ट करती है, ताकि मौजूदा भंडारण परिसंपत्तियों को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा सके।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ‘प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना’ को सचिवालय ने व्यापक कोल्ड चेन के विकास का मुख्य इंजन बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य कटाई‑पश्चात क्षति को न्यूनतम करना और किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य दिलाना है। योजना के तहत अंतरराज्यीय भंडारण एवं परिवहन अवसंरचना पर सामान्य क्षेत्रों में 35 प्रतिशत और विशेष क्षेत्रों में 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलती है, जबकि प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्द्धन परियोजनाओं के लिए यह सहायता क्रमशः 50 और 75 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। रेडिएशन सुविधाएँ समाहित करने वाली कोल्ड चेन परियोजनाओं के लिए अधिकतम दस करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध है, ताकि पूरी आपूर्ति श्रृंखला फार्म टू फोर्क को सुदृढ़ बनाया जा सके।

संसद को अवगत कराया गया कि इन योजनाओं से देश में भंडारण क्षमता बढ़ने के साथ‑साथ किसानों की आय में सुधार और कृषि अपव्यय में कमी आएगी। मंत्रालय के अनुसार, जल्द नष्ट होने वाली बागवानी फसलें जैसे फल, सब्ज़ियाँ, फूल और मसाले कोल्ड स्टोरेज की कमी से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। सब्सिडी के इस तंत्र से न केवल निजी क्षेत्र बल्कि सहकारी व पंचायत स्तर पर भी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।

सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे पात्र हितधारकों तक योजनाओं की जानकारी पहुँचाने और प्रस्तावों की ऑनलाइन स्वीकृति प्रक्रिया को पारदर्शी रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाएँ। मंत्री ठाकुर ने सदन को आश्वस्त किया कि कृषि इकोसिस्टम की ज़रूरतों के अनुरूप कोल्ड चेन नेटवर्क का विस्तार सरकार की प्राथमिकता सूची में बना रहेगा, ताकि किसानों की मेहनत खेत से मंडी तक सुरक्षित पहुँच सके।

Related posts

Leave a Comment