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जुलाई में महंगी हुई शाकाहारी थाली, लेकिन सालाना आधार पर ये है स्थिति

Vegetarian thali became expensive in July

नई दिल्ली: जुलाई में टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घर में तैयार होने वाली शाकाहारी थाली की लागत बढ़ गई। क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जून के मुकाबले जुलाई में शाकाहारी थाली 4 प्रतिशत महंगी हुई। हालांकि, पिछले साल की तुलना में सब्जियों, दालों और चावल की कीमतें कम रहने से शाकाहारी थाली अब भी 14 प्रतिशत सस्ती रही। दूसरी ओर, ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में गिरावट के चलते मांसाहारी थाली की लागत भी सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत कम रही।

जुलाई में शाकाहारी थाली की लागत बढ़ी

जून में शाकाहारी थाली की औसत लागत 27.1 रुपये थी, जो जुलाई में 4 प्रतिशत बढ़कर 28.1 रुपये हो गई। इसके विपरीत मांसाहारी थाली की लागत जून के 54.8 रुपये से 2 प्रतिशत घटकर जुलाई में 53.5 रुपये रह गई। हालांकि, सालाना तुलना में दोनों प्रकार की थालियों की लागत में बड़ी राहत देखने को मिली। पिछले साल जुलाई की तुलना में शाकाहारी थाली 14 प्रतिशत और मांसाहारी थाली करीब 13 प्रतिशत सस्ती रही।

टमाटर की कीमत में 31 प्रतिशत उछाल

शाकाहारी थाली की मासिक लागत बढ़ने का सबसे बड़ा कारण टमाटर रहा। जुलाई में बाजार में टमाटर की आवक 27 प्रतिशत घट गई, जिसके चलते इसकी कीमत में 31 प्रतिशत की तेजी आई। मॉनसून के दौरान आपूर्ति प्रभावित होने से टमाटर की कीमतों पर दबाव बढ़ा। आलू की कीमत में भी 2 प्रतिशत और प्याज की कीमत में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन प्रमुख सब्जियों की कीमत बढ़ने से परिवारों के रोजमर्रा के भोजन का खर्च बढ़ गया।

सालाना आधार पर सब्जियों ने दी बड़ी राहत

महीने के दौरान कीमतें बढ़ने के बावजूद पिछले साल की तुलना में प्रमुख सब्जियों के दाम काफी कम रहे। जुलाई में टमाटर की कीमत सालाना आधार पर 36 प्रतिशत घटकर करीब 42 रुपये प्रति किलोग्राम रही। पिछले साल जुलाई में टमाटर करीब 66 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था।

आलू और प्याज की कीमतों में बड़ी गिरावट

बेहतर उत्पादन और अनुकूल आधार प्रभाव के कारण आलू की कीमत सालाना आधार पर करीब 30 प्रतिशत और प्याज की कीमत 36 प्रतिशत कम हुई। पिछले साल बीमारी और खराब मौसम के कारण आलू की फसल प्रभावित हुई थी, जिससे कीमतों में तेज वृद्धि हुई थी। वहीं, इस साल प्याज का उत्पादन बेहतर रहने से बाजार में आपूर्ति बढ़ी और कीमतों में कमी आई। इससे शाकाहारी थाली की कुल लागत को कम रखने में मदद मिली।

दाल और चावल सस्ते होने से भी मिली राहत

दाल और चावल की कीमतों में कमी ने भी घरेलू भोजन के खर्च को कम करने में योगदान दिया। बेहतर उत्पादन और पर्याप्त भंडार के कारण दालों की कीमतें सालाना आधार पर 14 प्रतिशत घट गईं। वहीं, चावल की कीमत में करीब 4 प्रतिशत की कमी आई।

खाद्य तेल और रसोई गैस ने बढ़ाया खर्च

हालांकि, सभी जरूरी वस्तुओं की कीमतों में कमी नहीं आई। खाद्य तेल की कीमतें सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि रसोई गैस की कीमत में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इन दोनों वस्तुओं की महंगाई ने सब्जियों और दालों से मिलने वाली राहत को कुछ हद तक सीमित कर दिया।

चिकन सस्ता होने से मांसाहारी थाली को राहत

मांसाहारी थाली की लागत में कमी का सबसे बड़ा कारण ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में गिरावट रही। मांसाहारी थाली की कुल लागत में ब्रॉयलर चिकन की हिस्सेदारी करीब आधी होती है। जुलाई में इसकी कीमत महीने-दर-महीने आधार पर करीब 9 प्रतिशत और सालाना आधार पर अनुमानित 12 प्रतिशत कम हुई।

सावन और मॉनसून में कम मांग का असर

मॉनसून और सावन के दौरान मांसाहार की मांग आमतौर पर कम हो जाती है। इस अवधि में बड़ी संख्या में लोग मांस का सेवन कम कर देते हैं। मांग में कमी के कारण ब्रॉयलर चिकन की कीमतों पर दबाव आया और इसका सीधा फायदा मांसाहारी थाली की लागत पर पड़ा। कुल मिलाकर जुलाई में सब्जियों की कीमत बढ़ने से शाकाहारी थाली महीने के आधार पर महंगी हुई, लेकिन सालाना तुलना में खाद्य वस्तुओं की कम कीमतों ने परिवारों को राहत दी। वहीं, चिकन की कीमतों में गिरावट के कारण मांसाहारी थाली भी पिछले साल के मुकाबले सस्ती बनी रही।

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