हिसार, 29 जुलाई 2026: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने बाजरे की दो नई उन्नत संकर किस्में विकसित की हैं, जिनसे किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता मिलने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एचएचबी-299 और एचएचबी-67 संशोधित-2 किस्मों के बीज अब हरियाणा के साथ-साथ अन्य राज्यों के किसानों तक भी पहुंचेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय ने निजी बीज कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग समझौते किए हैं। इनमें आंध्र प्रदेश की एक बीज कंपनी भी शामिल है, जो इन किस्मों के बीज वहां के किसानों तक उपलब्ध कराएगी। विश्वविद्यालय का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण बीज समय पर उपलब्ध कराकर किसानों की लागत कम करना और उत्पादन बढ़ाना है।
नई संकर किस्मों से किसानों को मिलेगा अधिक लाभ
विश्वविद्यालय के अनुसार विकसित की गई दोनों संकर किस्में अधिक उत्पादन देने वाली, प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधी तथा बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल हैं। निजी बीज कंपनियों के सहयोग से इन किस्मों का व्यापक स्तर पर प्रसार किया जाएगा, जिससे देश के अधिक से अधिक किसान इनका लाभ उठा सकेंगे।
एचएचबी-299 की प्रमुख विशेषताएं
एचएचबी-299 बाजरे की अधिक उत्पादन देने वाली संकर किस्म है। इसमें लौह तत्व की मात्रा लगभग 73 भाग प्रति दस लाख तक पाई जाती है, जिससे इसका पोषण मूल्य भी अधिक माना जाता है। यह किस्म लगभग 80 से 82 दिनों में तैयार हो जाती है। बेहतर कृषि प्रबंधन अपनाने पर इससे लगभग 49 मन प्रति एकड़ तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इसके सिट्टे शंक्वाकार और मध्यम आकार के होते हैं तथा यह जोगिया रोग के प्रति प्रतिरोधी मानी जाती है।
जोगिया रोग से मिलती है सुरक्षा
जोगिया रोग बाजरे की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक माना जाता है। इस रोग के कारण पौधे छोटे रह जाते हैं, पत्तियों पर पीलापन दिखाई देता है और उनकी निचली सतह पर सफेद फफूंद जैसी परत बन जाती है। कई बार बालियों के स्थान पर घास जैसी हरी संरचनाएं विकसित हो जाती हैं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आती है। नई विकसित किस्मों में इस रोग के प्रति बेहतर प्रतिरोध क्षमता होने से किसानों को नुकसान की संभावना कम रहती है।
एचएचबी-67 संशोधित-2 भी किसानों के लिए बेहतर विकल्प
एचएचबी-67 संशोधित-2, पहले विकसित एचएचबी-67 संशोधित किस्म का उन्नत रूप है। इसे जोगिया रोग के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनाया गया है। यह किस्म हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसमें जल्दी पकने की क्षमता, सूखे को सहन करने की विशेषता, दाने और चारे की अच्छी गुणवत्ता तथा समय से पहले, सामान्य और देर से बुवाई करने की उपयुक्तता जैसे गुण मौजूद हैं। इससे औसतन 20 मन प्रति एकड़ दाने और 52 मन प्रति एकड़ सूखा चारा प्राप्त किया जा सकता है। बेहतर कृषि प्रबंधन अपनाने पर इसका उत्पादन और अधिक बढ़ सकता है।
अन्य उन्नत बाजरा किस्में भी हैं उपलब्ध
बाजरा की अन्य उन्नत किस्मों में आरएचबी-234, जीएचबी-538 और पूसा-605 भी किसानों के बीच लोकप्रिय हैं। आरएचबी-234 लगभग 80 से 81 दिनों में तैयार होती है और इसकी औसत उपज 30 से 31 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। जीएचबी-538 लगभग 70 से 75 दिनों में पक जाती है तथा इससे लगभग 24 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। वहीं पूसा-605 कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है और लगभग 75 से 80 दिनों में तैयार हो जाती है।
गुणवत्तापूर्ण बीज से बढ़ेगी किसानों की आय
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि उन्नत और रोग प्रतिरोधी बाजरा की किस्मों के उपयोग से किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और कम लागत का लाभ मिलेगा। निजी बीज कंपनियों के सहयोग से इन किस्मों की उपलब्धता बढ़ने से अधिक किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंच सकेंगे, जिससे बाजरा उत्पादन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ये भी पढ़ें: ई-नाम से बढ़ा किसानों का व्यापार, ऑनलाइन बिक्री को मिली नई रफ्तार
