नई दिल्ली: देश के किसान अब पारंपरिक खेती के सीमित दायरे से बाहर निकलकर कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। कृषि क्षेत्र में बदलते परिदृश्य और बाजार की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए फसलों में विविधता लाई जा रही है, जिसमें मौसमी सब्जियों की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने का मुख्य जरिया बन रही है। इन्हीं फसलों में सेम की खेती कम लागत, कम मेहनत और बेहतर उत्पादन क्षमता के कारण किसानों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हो रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि सेम की खेती सही समय पर और उन्नत किस्मों के साथ की जाए, तो किसान इससे बेहतरीन मुनाफा कमा सकते हैं। विशेष रूप से सेम की CT 123 किस्म उत्पादन और गुणवत्ता दोनों ही दृष्टिकोण से किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है।
CT 123 किस्म की मुख्य विशेषताएं और राष्ट्रीय बीज निगम की ऑनलाइन पहल
सेम की CT 123 किस्म अपनी उच्च गुणवत्ता और जबरदस्त रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए विशेष रूप से जानी जाती है। यह एक अगेती किस्म है जो कम समय में पककर तैयार हो जाती है, जिससे किसान एक ही वर्ष में कई बार उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इसके पौधे बेलदार और तेजी से फैलने वाले होते हैं, जिनका तना गहरे बैंगनी रंग का तथा फलियां हरे-सफेद रंग की होती हैं। आठ से दस सेंटीमीटर लंबी इन फलियों का बाजार मूल्य बहुत अच्छा मिलता है। किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ने इस किस्म के प्रमाणित बीजों को डिजिटल कॉमर्स के खुले नेटवर्क यानी ओएनडीसी प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन उपलब्ध कराया है, जहां से किसान घर बैठे बीज ऑर्डर कर सकते हैं।
रोग मुक्त फसल और मिट्टी की उर्वरता में सुधार से होने वाले दीर्घकालिक लाभ
इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कीटों और रोगों का प्रकोप न के बराबर होता है, जिससे किसानों को महंगे कीटनाशकों और रासायनिक दवाओं पर बेवजह खर्च नहीं करना पड़ता है। लागत घटने से किसानों का शुद्ध लाभ सीधे तौर पर बढ़ जाता है। इसके अलावा दलहनी फसल होने के कारण सेम के पौधे मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं, जिससे खेत की उर्वरता बनी रहती है। शहरों में पौष्टिक हरी सब्जियों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह किस्म छोटे और बड़े दोनों स्तर के किसानों के लिए एक सुरक्षित, कम जोखिम वाला और टिकाऊ आर्थिक विकल्प साबित हो रही है।
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