कृषि समाचार

हरियाणा में धान खरीद से पहले किसानों को बड़ी सलाह

Advice to farmers before paddy procurement in Haryana

पानीपत: हरियाणा में धान खरीद का मौसम शुरू होने से पहले कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों से सरकारी खरीद के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप सूखी धान मंडियों में लाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि धान में निर्धारित सीमा से अधिक नमी होने पर खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। किसानों द्वारा नमी के तय मानकों का पालन करने से मंडियों में खरीद व्यवस्था सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलेगी।

सूखी धान मंडियों में लाने की अपील

पानीपत स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में जिला अध्यक्ष दुष्यंत भट्ट के साथ पत्रकारों से बातचीत करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों और आढ़तियों की जायज मांगों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है।

समय पर कृषि कार्य और वैज्ञानिक तकनीक पर जोर

श्याम सिंह राणा ने कहा कि धान हरियाणा की प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है। बेहतर उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता के लिए किसानों को कृषि कार्य समय पर पूरा करने के साथ वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना चाहिए। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे कटाई के बाद धान को पर्याप्त रूप से सुखाकर ही मंडियों में लेकर आएं, ताकि सरकारी खरीद के दौरान अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

खेतों में धान की फसल पर लगातार निगरानी

कृषि मंत्री ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारी लगातार खेतों का दौरा कर धान की फसल की स्थिति का आकलन कर रहे हैं। अधिकारियों द्वारा फसल की उपज, पौधों की स्थिति और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता समेत कई पहलुओं पर नजर रखी जा रही है।

कीट और रोगों के प्रकोप पर भी नजर

धान की फसल में कीट और रोगों के संभावित प्रकोप की भी निगरानी की जा रही है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करें और फसल में किसी तरह की असामान्य स्थिति दिखाई देने पर तुरंत कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें। कृषि विभाग का उद्देश्य समय रहते फसल से जुड़ी समस्याओं की पहचान करना और किसानों को आवश्यक तकनीकी सलाह उपलब्ध कराना है।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर

श्याम सिंह राणा ने कहा कि केंद्र सरकार वर्ष 2047 तक प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लक्ष्य पर काम कर रही है। हरियाणा में भी प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

गोबर से तैयार खाद के उपयोग की अपील

कृषि मंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने और गोबर से तैयार खाद के उपयोग को बढ़ाने की अपील की। उनका कहना है कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से खेती की लागत को कम करने में मदद मिल सकती है और किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं। सरकार का जोर खेती में बाहरी लागत को कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर भी है।

पराली प्रबंधन में हरियाणा के प्रयासों की सराहना

कृषि मंत्री ने फसल अवशेष प्रबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि हरियाणा ने पराली प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया है। जागरूकता अभियानों और सरकारी प्रयासों के कारण किसानों में पराली नहीं जलाने को लेकर सकारात्मक बदलाव आया है।

किसानों में बढ़ी जागरूकता

उन्होंने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए गए हैं। किसानों को फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन के विकल्पों की जानकारी दी गई है। इन प्रयासों के कारण किसानों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

15 सितंबर से धान खरीद शुरू करने की किसानों की मांग

इस बीच कुरुक्षेत्र में कृषि से जुड़े मुद्दों को लेकर किसानों की बड़ी महापंचायत आयोजित हुई। इसमें अलग-अलग किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया। करीब तीन घंटे तक चली महापंचायत में किसानों और पशुपालकों से जुड़े नौ प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई।

दस किसान संगठनों ने रखी संयुक्त मांग

महापंचायत में शामिल दस किसान संगठनों ने संयुक्त रूप से मांग की कि धान की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 15 सितंबर से शुरू की जाए। किसानों का कहना है कि कई क्षेत्रों में धान की फसल तैयार हो चुकी है। यदि समय पर सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई तो किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी हो सकती है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसान नेताओं ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांग पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती है तो आगे की रणनीति तय करने के लिए दोबारा बैठक बुलाई जाएगी।

उपायुक्त को सौंपा गया मांगों का ज्ञापन

किसानों ने हाल ही में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कुरुक्षेत्र के उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा को ज्ञापन भी सौंपा था। इसमें मंडियों और सरकारी खरीद व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़ी कई मांगें शामिल थीं।

हर पांच किलोमीटर पर खरीद केंद्र बनाने की मांग

किसानों का कहना है कि मौजूदा मंडियां बढ़ते उत्पादन और फसल की आवक के मुकाबले पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए हर पांच किलोमीटर की दूरी पर नए खरीद केंद्र और उपमंडियां स्थापित की जानी चाहिए।किसानों के अनुसार, इससे उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और मंडियों में फसल की अधिक भीड़ से भी बचा जा सकेगा।

सामान्य तौर पर एक अक्टूबर से शुरू होती है खरीद

हरियाणा में सामान्य परिस्थितियों में धान की सरकारी खरीद एक अक्टूबर से शुरू होती है। हालांकि पिछले वर्ष किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने खरीद प्रक्रिया 22 सितंबर से ही शुरू कर दी थी।

इस बार भी समय से पहले खरीद की उम्मीद

पिछले वर्ष समय से पहले सरकारी खरीद शुरू किए जाने के कारण इस बार किसानों को भी उम्मीद है कि सरकार धान की आवक और किसानों की स्थिति को देखते हुए निर्धारित तारीख से पहले खरीद शुरू कर सकती है। किसानों का कहना है कि समय पर खरीद शुरू होने से उन्हें अपनी तैयार फसल को मंडियों में बेचने में सुविधा होगी और निजी खरीदारों पर निर्भरता कम होगी।

मंडियों में तैयारियों को अंतिम रूप दे रही सरकार

दूसरी ओर, हरियाणा सरकार आगामी धान खरीद सत्र की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। मंडियों में बुनियादी सुविधाओं, भंडारण व्यवस्था और खरीद केंद्रों की तैयारियों की समीक्षा की जा रही है।

किसानों को परेशानी से बचाने की तैयारी

सरकार का प्रयास है कि धान की आवक बढ़ने के बाद मंडियों में किसानों को फसल बेचने में अनावश्यक इंतजार न करना पड़े। खरीद केंद्रों की व्यवस्था, भंडारण और अन्य जरूरी सुविधाओं को दुरुस्त करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अब किसानों की नजर सरकार के अगले फैसले पर है। एक ओर कृषि मंत्री ने निर्धारित नमी के अनुरूप सूखी धान मंडियों में लाने की अपील की है, वहीं किसान संगठन 15 सितंबर से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र में चीनी मिलों को आसान ऋण मंजूर, एफआरपी का होगा भुगतान

Related posts

Leave a Comment