नई दिल्ली: सर्दियां गुलाब के पौधों के लिए सबसे अनुकूल मौसम मानी जाती हैं, क्योंकि सर्दियों में गुलाब की बढ़वार तेज हो जाती है। इस मौसम में तापमान में गिरावट और ठंडी हवाओं के कारण पौधों को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सही तरीके अपनाए जाएं तो सर्दियों में गुलाब के पौधों से फूलों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है और कलियों की क्वालिटी भी बेहतरीन रहती है।
धूप जरूरी, कमजोर रोशनी में कम आते हैं फूल
विशेषज्ञ बताते हैं कि गुलाब के पौधों को सर्दियों में कम से कम चार से छह घंटे की अच्छी धूप मिलनी चाहिए। ठंड के दिनों में धूप कमजोर और कम समय की होती है, इसलिए पौधों को धूप वाले स्थान पर रखना अनिवार्य हो जाता है। छत, बालकनी या किसी खुले हिस्से में गमले रखने से पौधे बेहतर विकसित होते हैं। कम धूप मिलने पर पौधे में फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और फूलों की संख्या घट जाती है।
पाला और ठंडी हवाओं से पौधों को बचाना बेहद जरूरी
तेज ठंड, पाला और शीतलहर गुलाब की नई पत्तियों और कलियों को नुकसान पहुंचा सकती है। यदि रात का तापमान काफी नीचे जा रहा हो तो गमले को घर के अंदर रखकर या पौधे को जूट की बोरी, कपड़े या नेट से ढककर सुरक्षित रखना चाहिए। सुबह धूप लगते ही कवर हटा देना जरूरी है, ताकि पौधा प्रकाश ग्रहण कर सके।
इस वजह से होता है पौधा कमजोर
सर्दियों में मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, इसलिए गुलाब को बार-बार पानी देना नुकसानदायक हो सकता है। मिट्टी की ऊपरी परत जब सूख जाए तब ही हल्का पानी देना उपयुक्त है। ज्यादा पानी जड़ों को सड़ा देता है और पौधे पर काले धब्बे आ सकते हैं।
खाद की बात करें तो सर्दियों की शुरुआत में गोबर की सड़ी खाद, वर्मी-कम्पोस्ट, बोन मील, सरसों खली और नीम खली देना बेहद फायदेमंद होता है। पोटाश और फॉस्फोरस वाली खादें फूल बड़े, चमकीले और स्वस्थ बनाती हैं।
छंटाई से पौधा बनेगा ज्यादा मजबूत, आएंगी अधिक कलियां
ठंड की शुरुआत में प्रूनिंग यानी छंटाई करने से गुलाब के पौधे की ग्रोथ में तेजी आती है। सूखी, बीमार और कमजोर शाखाओं को हटाने से पौधे को नई ऊर्जा मिलती है और मजबूत शाखाओं पर अधिक कलियां विकसित होती हैं। प्रूनिंग के बाद हल्की खाद देना भी विशेषज्ञों द्वारा सुझाया जाता है।
कीट और रोगों से सावधान, सर्दी में बढ़ जाती है समस्या
सर्दियों में एफिड्स, मिलीबग और थ्रिप्स जैसे कीट गुलाब के पौधों पर तेजी से हमला करते हैं। पत्तों की नियमित जांच करना जरूरी है। संक्रमण दिखने पर नीम तेल का छिड़काव काफी प्रभावी रहता है। फंगल संक्रमण से बचने के लिए भी नीम तेल और बेकिंग सोडा का घोल उपयोगी माना जाता है। रासायनिक दवाओं का प्रयोग केवल गंभीर स्थिति में ही किया जाना चाहिए।
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