जयपुर: राजस्थान इस बार मॉनसून की मार झेल रहा है। राज्य के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने दावा किया है कि अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में 193 लोगों की मौत हो चुकी है, जो इस सीजन में सबसे ज्यादा है। वहीं, भारी बारिश के कारण राजस्थान में खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है। मंत्री ने कहा कि नुकसान का आकलन करने के लिए राज्य सरकार सर्वेक्षण करा रही है, जो 15 सितंबर तक पूरा हो जाएगा।
बारिश से मौतों का आंकड़ा बढ़ा
कृषि मंत्री मीणा ने बताया कि राजस्थान में इस बार सबसे ज्यादा बारिश हुई है और बारां जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा है। अकेले बारां जिले में 13 लोगों की मौत हुई है, जिनमें से आठ परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है। राज्य के लगभग सभी बांध पानी से लबालब भर चुके हैं, जिससे बाढ़ जैसे हालात बने हैं।
खरीफ फसलों को नुकसान
किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि 40 से 70 प्रतिशत तक खरीफ फसलें चौपट हो गई हैं। पहले 50% से ज्यादा नुकसान वाले किसानों को मुआवजा दिया जाता था, लेकिन अब केंद्र ने यह सीमा घटाकर 35% कर दी है। लगातार बारिश के कारण कई जगह खेत तालाब में बदल गए हैं और फसलें सड़ चुकी हैं।
22 जिलों में भारी तबाही, 15 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, 22 जिलों में फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है, जिनमें से 15 जिले ऐसे हैं जहां 50% से ज्यादा फसलें बर्बाद हो गई हैं। खरीफ सीजन में राजस्थान में मूंग, उड़द, सोयाबीन, बाजरा, मक्का, तिल और धान जैसी प्रमुख फसलें बोई गई थीं।
दलहन और तिलहन फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित
बारिश का सबसे ज्यादा असर दलहन और तिलहन फसलों पर पड़ा है। कई जगहों पर मूंग और उड़द की फसल गलकर खेतों में सड़ गई है। वहीं, सोयाबीन और बाजरा की स्थिति भी बेहद खराब है। इसके अलावा मिर्च, ग्वार, मूंगफली और मक्का जैसी फसलें भी प्रभावित हुई हैं।
किसानों को मुआवजे की उम्मीद
राज्य सरकार ने गिरदावरी प्रक्रिया शुरू कर दी है। कृषि मंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार नकली खाद, बीज और कीटनाशकों पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है, ताकि किसानों को धोखाधड़ी से बचाया जा सके।
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