खेती-किसानी

मूंगफली की खेती: गिरनार-4 और गिरनार-5 किस्मों से किसानों को मिल रही रिकॉर्ड पैदावार

भारत में मूंगफली की सबसे अधिक खेती करने वाला राज्य गुजरात अब पूरे देश के किसानों के लिए एक आदर्श उदाहरण बनता जा रहा है। राज्य के किसान जहां परंपरागत खेती से हटकर उन्नत तकनीकों और किस्मों का प्रयोग कर रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार ने भी गुजरात के इस मॉडल को सराहा है। हाल ही में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुजरात के खेतों का दौरा करते हुए कहा कि यहां के किसान मूंगफली की खेती में मेहनती ही नहीं, बल्कि बेहद जागरूक भी हैं। उन्होंने विशेष रूप से गिरनार-4 और गिरनार-5 जैसी नई किस्मों की खेती को खेती की दिशा बदलने वाला कदम बताया।

गुजरात के कई जिलों में गिरनार-4 और गिरनार-5 मूंगफली की नई किस्मों ने किसानों की किस्मत बदल दी है। ये दोनों किस्में देश के अन्य हिस्सों में उगाई जा रही पारंपरिक किस्मों की तुलना में औसतन 500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन देती हैं। खासतौर पर गिरनार-4 किस्म में 78.5% ओलिक एसिड पाया जाता है, जिसकी मांग पीनट बटर, मूंगफली तेल और चॉकलेट जैसे उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पादों में तेजी से बढ़ रही है। इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सूखा, ब्लैक फंगस और कम उत्पादन जैसी आम समस्याओं से काफी हद तक सुरक्षित रहती है।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खेतों में लहलहाती मूंगफली की फसल देख कर किसानों की मेहनत की तारीफ की और कहा कि गिरनार-4 केवल एक बीज नहीं, बल्कि विकसित भारत की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि देशभर के किसानों को इन किस्मों का लाभ मिलना चाहिए, ताकि भारत तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सके।

अपने दौरे के दौरान मंत्री ने खेतों में मूंगफली की निराई-गुड़ाई के लिए इस्तेमाल हो रही आधुनिक मशीनों का भी निरीक्षण किया और खुद मशीन चलाकर उसकी कार्यप्रणाली देखी। किसानों ने उन्हें बताया कि इस मशीन से खरपतवार नियंत्रण आसान होता है, जिससे न केवल फसल को नुकसान नहीं होता बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है। साथ ही, इससे मजदूरी की लागत कम होती है और उत्पादन बढ़ता है। इस पर मंत्री ने कहा कि ऐसे आधुनिक कृषि उपकरण खेती को आसान और लाभकारी बना रहे हैं।

कृषि मंत्री को किसानों और वैज्ञानिकों ने यह भी जानकारी दी कि गिरनार-4 और गिरनार-5 किस्मों की खेती से उत्पादन तो बढ़ा ही है, साथ ही लागत में भी भारी कमी आई है। बाजार में इन किस्मों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों की आमदनी में भी इजाफा हो रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत आने वाले आईआईसीजीआर ने इन किस्मों को वर्ष 2021 में विकसित किया था, जो अब पूरे गुजरात में लोकप्रिय हो चुकी हैं। गुजरात के किसान जिस तरह से नई तकनीक और किस्मों को अपनाकर मूंगफली उत्पादन में क्रांति ला रहे हैं, वह देश के अन्य राज्यों के किसानों के लिए एक प्रेरणा बन गया है। केंद्र सरकार की मंशा है कि इस सफलता को पूरे देश में दोहराया जाए, ताकि खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

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