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मार्च की बारिश ने रबी फसलों को किया तबाह, किसानों की बढ़ी चिंता

March rain farm

नई दिल्ली: मार्च दो हजार छब्बीस का मौसम किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बनकर सामने आया है। जब रबी फसलें पककर तैयार थीं और किसान कटाई की तैयारी कर रहे थे, तभी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। मार्च की बारिश के पीछे पश्चिमी विक्षोभ को मुख्य कारण माना जा रहा है, जिसने उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के कई राज्यों को प्रभावित किया है।

कई राज्यों में फसलों को भारी नुकसान

हाल ही में हुई तेज बारिश और हवाओं ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में खड़ी फसलों को गिरा दिया है। इससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।

गेहूं और सरसों पर सबसे ज्यादा असर

इस बेमौसम बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है। तेज हवाओं के कारण फसल जमीन पर गिर गई, जिससे दानों की गुणवत्ता खराब होने और पैदावार घटने का खतरा बढ़ गया है। सरसों की फसल भी इससे अछूती नहीं रही, जहां तैयार फसल ओलावृष्टि के कारण टूट गई और कई जगह कटी हुई फसल भी भीगकर खराब हो गई।

मसाले और दलहनी फसलें भी प्रभावित

राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर क्षेत्रों में जीरा और इसबगोल की फसलों को चालीस से अस्सी प्रतिशत तक नुकसान की खबर है। वहीं बिहार और आसपास के क्षेत्रों में मक्का और दलहनी फसलों पर भी मौसम की मार पड़ी है। इसके अलावा आम और लीची के बौर पर भी असर पड़ा है, जिससे उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है।

बागवानी फसलों को भी बड़ा झटका

महाराष्ट्र में अंगूर, अनार, टमाटर और प्याज जैसी बागवानी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। खासतौर पर आम के बौर झड़ने से इस साल उत्पादन में गिरावट की संभावना है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि कई किसानों ने इन फसलों में भारी निवेश किया था।

किसानों को दी गई सतर्क रहने की सलाह

कृषि विशेषज्ञों और मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि जो फसल पक चुकी है, उसकी कटाई जल्द पूरी कर लें। कटी हुई फसल को सुरक्षित और सूखी जगह पर रखें तथा उसे ढककर बचाएं। खेतों में जलभराव न होने दें और उचित निकासी की व्यवस्था करें, ताकि फसलों में नमी के कारण रोग न फैलें। साथ ही किसानों को स्थानीय मौसम की जानकारी पर नजर बनाए रखने और समय-समय पर विशेषज्ञों की सलाह लेने की भी हिदायत दी गई है। यह मौसम किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि राहत के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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