खेती-किसानी

महिंद्रा मैक्ससीडर से पराली के बीच होगी गेहूं की बुवाई, घटेगा खर्च

Mahindra Max Seeder will sow wheat in the stubble

नई दिल्ली: खेती को आसान बनाने और धान की पराली जलाने की समस्या कम करने के लिए महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी नई मैक्ससीडर मशीन का व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। यह मशीन खेत से पराली हटाए बिना अगली फसल की बुवाई करने में मदद करेगी। इससे किसानों को खेत तैयार करने में कम मेहनत करनी पड़ सकती है और डीजल, मजदूरी तथा खेती के अन्य खर्चों में बचत की संभावना है। कंपनी इस मशीन का उत्पादन मध्य प्रदेश के पीथमपुर स्थित अपने विशेष कृषि मशीनरी संयंत्र में कर रही है। इसे कनाडा की क्लीन सीड टेक्नोलॉजीज की तकनीक के लाइसेंस के तहत तैयार किया गया है। मशीन का उद्देश्य फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन करते हुए किसानों को समय पर बुवाई की सुविधा देना है।

बिना जुताई के बुवाई कर सकती है मैक्ससीडर

मैक्ससीडर बिना जुताई के बुवाई करने वाली आधुनिक कृषि मशीन है। इसकी मदद से किसान धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली के बीच सीधे अगली फसल के बीज बो सकते हैं। सामान्य तौर पर धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई से पहले खेत तैयार करने के लिए जुताई और अन्य काम करने पड़ते हैं। कई क्षेत्रों में किसान पराली हटाने या उसे जलाने का विकल्प अपनाते हैं। इस मशीन से खेत की मिट्टी को कम छेड़ते हुए बुवाई की जा सकती है। इससे पराली जलाने की जरूरत घटाने और मिट्टी की संरचना को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।

गेहूं, धान, मक्का और सोयाबीन की बुवाई में उपयोगी

मैक्ससीडर को अलग-अलग फसलों की जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया गया है। इससे गेहूं, धान, मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों की बुवाई की जा सकती है। मशीन में पांच अलग-अलग बुवाई इकाइयां दी गई हैं, जिनकी सहायता से फसल के अनुसार बुवाई की व्यवस्था बदली जा सकती है। कतारों के बीच की दूरी भी जरूरत के अनुसार निर्धारित की जा सकती है। इससे किसानों को अलग-अलग फसलों के लिए बुवाई की व्यवस्था करने में सुविधा मिल सकती है और कई परिस्थितियों में अलग मशीनों पर निर्भरता कम हो सकती है।

बीज और खाद के बेहतर इस्तेमाल में मिलेगी मदद

इस मशीन में इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण इकाई दी गई है, जो बीज और खाद की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करती है। कंपनी के अनुसार, इसकी व्यवस्था के जरिए बीज, डीएपी और यूरिया का इस्तेमाल अधिक सटीक तरीके से किया जा सकता है। इसे मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से भी नियंत्रित करने की सुविधा दी गई है। मशीन में खाद डालने की ऐसी व्यवस्था है, जिससे यूरिया को बीज की कतार से लगभग डेढ़ इंच नीचे रखा जा सकता है। इससे खाद को पौधों की जड़ों के नजदीक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक बचत खेत की मिट्टी, फसल की जरूरत और मशीन की सही सेटिंग पर निर्भर करेगी।

35 हॉर्स पावर या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर से संचालन

मैक्ससीडर को चलाने के लिए कम से कम 35 हॉर्स पावर क्षमता वाले ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे उन किसानों के लिए भी इस तकनीक को अपनाना संभव हो सकता है, जिनके पास बहुत अधिक क्षमता वाला ट्रैक्टर नहीं है। हालांकि, मशीन का सुचारु संचालन ट्रैक्टर की वास्तविक क्षमता, खेत की स्थिति, मिट्टी की नमी और पराली की मात्रा पर निर्भर करेगा। किसानों को मशीन खरीदने से पहले अपने ट्रैक्टर की अनुकूलता और खेत की जरूरतों की जानकारी संबंधित विक्रेता से लेनी चाहिए।

समय, डीजल और मजदूरी की बचत की संभावना

बुवाई से पहले खेत तैयार करने में कई बार जुताई और अन्य कृषि कार्य करने पड़ते हैं। बिना जुताई की तकनीक से इन कामों की जरूरत कम हो सकती है, जिससे समय, डीजल और मजदूरी पर होने वाला खर्च घटने की संभावना है। धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए समय सीमित होता है। ऐसे में पराली के बीच सीधे बुवाई करने वाली मशीन किसानों को समय पर अगली फसल लगाने में मदद कर सकती है। हालांकि, बचत की वास्तविक मात्रा खेत की दशा, मशीन के उपयोग और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

पंजाब और हरियाणा में मशीन का परीक्षण

कंपनी के मुताबिक, मैक्ससीडर का पंजाब और हरियाणा के खेतों में परीक्षण किया गया है। इन परीक्षणों के दौरान मशीन ने धान की पराली के बीच बुवाई करने की क्षमता दिखाई। उत्तर भारत में धान की कटाई के बाद पराली जलाना वायु प्रदूषण की प्रमुख समस्याओं में से एक रहा है। ऐसे में पराली हटाए बिना बुवाई करने वाली मशीनें किसानों को फसल अवशेषों के प्रबंधन का एक विकल्प दे सकती हैं। हालांकि, इसका प्रभाव पराली की मात्रा, खेत की स्थिति और मशीन के उचित संचालन पर निर्भर करेगा।

पहले पंजाब और हरियाणा में होगी बिक्री

महिंद्रा के अनुसार, मैक्ससीडर की बिक्री कंपनी के कृषि उपकरण विक्रेताओं के माध्यम से की जाएगी। इसकी शुरुआत पंजाब और हरियाणा से होगी। आगे चलकर किसानों की जरूरत और बाजार की मांग के आधार पर दूसरे क्षेत्रों में भी इसे उपलब्ध कराने की योजना है। कंपनी के कृषि उपकरण कारोबार के अध्यक्ष विजय नाकरा ने आधुनिक और टिकाऊ कृषि मशीनों को किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य पर जोर दिया है। वहीं, क्लीन सीड टेक्नोलॉजीज के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्रेम लेम्पियर ने मशीन का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

पराली प्रबंधन और खेती की लागत घटाने में कितनी कारगर होगी मशीन?

मैक्ससीडर का मुख्य उद्देश्य पराली के बीच बुवाई को आसान बनाना, खेती में लगने वाले समय और खर्च को कम करना तथा कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है। इससे किसानों को खेत में पराली जलाए बिना अगली फसल लगाने का विकल्प मिल सकता है। अब इसकी वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि अलग-अलग खेतों में इससे कितनी बचत होती है, बुवाई कितनी प्रभावी रहती है और किसानों को इसकी खरीद तथा संचालन की लागत के मुकाबले कितना लाभ मिलता है।

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