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हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित की गेहूं की नई किस्म WH 1309

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय

हिसार: देश में बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के बीच अब किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCSHAU), हिसार के वैज्ञानिकों ने गेहूं की एक नई पछेती किस्म WH 1309 विकसित की है, जो न केवल गर्मी सहनशील है बल्कि अधिक उपज और बेहतर गुणवत्ता भी प्रदान करती है। यह किस्म खास तौर पर उन किसानों के लिए उपयोगी साबित होगी, जो धान की कटाई में देरी के बाद गेहूं की बुवाई करते हैं।

WH 1309 की खासियतें: कम समय में तैयार और रोग प्रतिरोधी

इस नई गेहूं की किस्म 83 दिनों में बालियां निकालती है और 123 दिनों में पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है। इसके पौधों की ऊंचाई लगभग 98 सेंटीमीटर होती है, जिससे फसल के गिरने का खतरा बेहद कम रहता है। इसके दाने मोटे, चमकीले और आकर्षक होते हैं, जिनमें 13.2% प्रोटीन, 81.9 हेक्टोलीटर वजन और 54 मिली अवसादन मान पाया गया है। सबसे अहम बात यह है कि WH 1309 किस्म कई प्रकार के रोगों से सुरक्षित है और इसे जैविक खेती तथा लवणीय मिट्टी वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उगाया जा सकता है।

पैदावार में बढ़त: WH 1124 से 12.7% अधिक उत्पादन

WH 1309 किस्म ने उत्पादकता के मामले में पुराने गेहूं की किस्मों को पीछे छोड़ दिया है। सिंचित परिस्थितियों में इसकी औसत उपज 55.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और अधिकतम उपज 64.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। हरियाणा के विभिन्न जिलों में हुए परीक्षणों में भी इस किस्म की औसत पैदावार 54.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही, जो प्रसिद्ध WH 1124 किस्म से करीब 12.7 प्रतिशत अधिक है।

बुवाई का सही समय और उर्वरक की मात्रा

कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजबीर गर्ग, निदेशक (अनुसंधान), CCSHAU के अनुसार, WH 1309 की बुवाई 1 दिसंबर से 20 दिसंबर के बीच करना सबसे उपयुक्त है। उन्होंने बताया कि बीज की मात्रा 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखनी चाहिए। अधिकतम उत्पादन के लिए प्रति हेक्टेयर निम्न उर्वरक मात्रा की सलाह दी गई है:

  • नाइट्रोजन (N): 150 किलोग्राम
  • फास्फोरस (P): 60 किलोग्राम
  • पोटाश (K): 30 किलोग्राम
  • जिंक सल्फेट: 25 किलोग्राम

किसानों के लिए फायदे: गर्मी में भी बढ़िया प्रदर्शन

यह किस्म विशेष रूप से मार्च महीने की गर्मी को झेलने में सक्षम है, जबकि सामान्य गेहूं की फसल उस समय तापमान बढ़ने से प्रभावित होती है। इसके अलावा, WH 1309 धान की देर से कटाई के बाद भी सफलतापूर्वक बोई जा सकती है, जिससे किसान समय की कमी के बावजूद अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं। इसके मोटे और चमकीले दाने बाजार में अधिक मांग सुनिश्चित करेंगे, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और लाभ में वृद्धि होगी।

वैज्ञानिकों की टीम ने किया उल्लेखनीय कार्य

इस किस्म के विकास में विश्वविद्यालय के गेहूं एवं जौ अनुभाग की वैज्ञानिक टीम ने वर्षों की मेहनत लगाई है। टीम में डॉ. विक्रम सिंह, एम.एस. दलाल, ओ.पी. बिश्नोई, दिव्या फोगाट, योगेंद्र कुमार, हर्ष सोमवीर सहित अन्य वैज्ञानिक शामिल रहे। इन वैज्ञानिकों के प्रयासों से अब किसानों के पास एक ऐसी किस्म उपलब्ध है, जो उच्च उपज, गुणवत्ता और गर्मी सहनशीलता तीनों गुणों से लैस है।

निष्कर्ष: किसानों के लिए वरदान साबित होगी WH 1309

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की नई किस्म WH 1309 किसानों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है। यह न केवल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करेगी, बल्कि खेती की उत्पादकता और लाभ दोनों को बढ़ाएगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान इस किस्म को बड़े पैमाने पर अपनाते हैं तो हरियाणा ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में गेहूं उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है।

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