कृषि समाचार

गुजरात में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का ऐलान: 15 अगस्त तक देश में होंगी 2 करोड़ ‘लखपति दीदियां’

गुजरात में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि देश में अब तक 1.5 करोड़ महिलाएं ‘लखपति दीदियां’ बन चुकी हैं और 15 अगस्त 2025 तक यह आंकड़ा 2 करोड़ तक पहुंच जाएगा। यह उपलब्धि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। शिवराज सिंह चौहान स्वयं सहायता समूहों की दीदियों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बताया कि केवल लखपति दीदियां ही नहीं, बल्कि ऐसे लाखों महिलाएं भी हैं जिनकी सालाना आय 10 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं की सफलता का परिणाम है। उन्होंने यह भी बताया कि 50 लखपति दीदियों की प्रेरणादायक कहानियों का एक संकलन भी प्रकाशित किया गया है, जिससे अन्य महिलाएं सीख और प्रेरणा ले सकें।

कृषि मंत्री ने कहा कि ये स्वयं सहायता समूह न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि समाज में लैंगिक भेदभाव को भी चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का जिक्र किया जिसमें देश की हर महिला को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना लक्ष्य है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि महिलाओं को सही प्रशिक्षण, बैंकिंग सुविधा, ऋण और बाज़ार से जुड़ने के पर्याप्त अवसर मिलें ताकि वे आर्थिक रूप से आगे बढ़ सकें और अपने परिवार व समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

रक्षाबंधन के अवसर पर उन्होंने देशभर की ‘लखपति दीदियों’ को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व महिलाओं की शक्ति और उनके योगदान का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार महिलाओं के साथ खड़ी है और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सभी आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण महिलाएं ‘लोकल से वोकल’ के अभियान में अहम भूमिका निभा सकती हैं। अगर उन्हें सही संसाधन और समर्थन मिल जाए, तो वे न केवल अपने उत्पादों को बाज़ार तक पहुंचा सकती हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकती हैं। 15 अगस्त तक दो करोड़ लखपति दीदियों के लक्ष्य को कृषि मंत्री ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बताया और कहा कि यह न सिर्फ़ आंकड़ों की बात है, बल्कि यह बदलाव देश की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को नई दिशा देने वाला है।

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