पटना: नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए मछली पालन बिहार में स्वरोजगार का एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार किसानों और इच्छुक उद्यमियों को आधुनिक तकनीकों का मुफ्त प्रशिक्षण दे रही है, ताकि वे मछली पालन को व्यवस्थित कारोबार के रूप में विकसित कर सकें। जहानाबाद के रवि रंजन कुमार इसकी एक मिसाल हैं। बेरोजगारी का सामना करने के बाद उन्होंने मत्स्य विभाग से मार्गदर्शन लिया और मछली पालन शुरू किया। उनके मुताबिक, एक एकड़ के तालाब से सालाना 10 से 12 लाख रुपये का कारोबार हो सकता है, जबकि खर्च निकालने के बाद करीब 4 से 5 लाख रुपये की बचत होती है। वह रोहू, कतला, मृगल और पंगास जैसी मछलियों का पालन कर रहे हैं।
बिहार में 10 हजार लोगों को मुफ्त प्रशिक्षण देने का लक्ष्य
बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 9,685 किसानों और मछली पालन में रुचि रखने वाले लोगों को मुफ्त तकनीकी प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक राज्य के 70,221 मछली पालक बिहार और देश के अन्य हिस्सों में स्थित मत्स्य संस्थानों में प्रशिक्षण ले चुके हैं। इस कार्यक्रम के तहत तालाब के बेहतर उपयोग, मछलियों के पालन की आधुनिक विधियों, उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों और कारोबार से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जाती है। निजी तालाब, पट्टे पर लिए गए तालाब या सरकारी तालाब में मछली पालन करने के इच्छुक किसान और उद्यमी निर्धारित पात्रता के अनुसार प्रशिक्षण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान आने-जाने और रहने की सुविधा
प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत चयनित प्रतिभागियों को तकनीकी जानकारी देने के साथ आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी है। राज्य से बाहर प्रशिक्षण लेने जाने वाले प्रतिभागियों को नियमानुसार आने-जाने का किराया दिया जाता है। इसके अलावा प्रशिक्षण, रहने और भोजन की सुविधाएं भी मुफ्त उपलब्ध कराने का प्रावधान है। बांका जिले के चांदन प्रखंड के जितेंद्र कुमार चौधरी और राकेश कुमार चौधरी पटना में प्रशिक्षण लेने पहुंचे। उनका कहना है कि यहां सीखी गई तकनीकों को अपने क्षेत्र में अपनाकर मछली पालन को बेहतर बनाया जा सकता है। विशेष रूप से मछली के बीज का सही तरीके से संचयन और उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी जानकारी उनके लिए उपयोगी है।
एक साल में 59 हजार टन बढ़ा बिहार का मछली उत्पादन
बिहार में मछली पालन का विस्तार उत्पादन के आंकड़ों में भी दिखाई देता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य का कुल मछली उत्पादन 9.69 लाख टन था, जो 2025-26 में बढ़कर 10.28 लाख टन हो गया। इस तरह एक साल में उत्पादन में करीब 59 हजार टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई। उत्पादन में वृद्धि से मछली पालन, बीज उत्पादन, चारा आपूर्ति और मछलियों की बिक्री से जुड़े कारोबार में अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, मछली पालन से होने वाली वास्तविक कमाई तालाब की स्थिति, पानी की गुणवत्ता, मछलियों की प्रजाति, चारे की लागत, मृत्यु दर और स्थानीय बाजार में मिलने वाली कीमत पर निर्भर करती है।
रोहू, कतला और पंगास पालन से कमा सकते हैं किसान
मछली पालन शुरू करने वाले किसानों के लिए रोहू, कतला, मृगल और पंगास जैसी प्रजातियां विकल्प हो सकती हैं। हालांकि, किस प्रजाति का पालन करना लाभदायक रहेगा, यह तालाब की गहराई, पानी की गुणवत्ता, उपलब्ध संसाधनों और बाजार की मांग पर निर्भर करता है। अच्छी कमाई के लिए मछली के स्वस्थ बीज का चयन, संतुलित आहार, पानी की नियमित जांच और समय पर मछलियों की देखभाल जरूरी है। किसानों को कारोबार शुरू करने से पहले बीज, चारा, तालाब की तैयारी, श्रम और बिक्री से जुड़ी लागत का हिसाब भी तैयार करना चाहिए।
मुफ्त प्रशिक्षण से युवाओं को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर
मछली पालन में नए लोगों के सामने शुरुआती निवेश, तकनीकी जानकारी की कमी और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियां होती हैं। बिहार सरकार का मुफ्त प्रशिक्षण कार्यक्रम इन समस्याओं को कम करने की दिशा में एक प्रयास है। प्रशिक्षण के माध्यम से इच्छुक लोग मछली पालन की वैज्ञानिक विधियां सीखकर बेहतर उत्पादन की योजना बना सकते हैं और नुकसान का जोखिम घटा सकते हैं। इसके साथ ही प्रशिक्षित मछली पालकों को आगे भी तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण बीज और बाजार से जुड़ी सुविधाएं मिलना महत्वपूर्ण है। सही योजना और उचित प्रबंधन के साथ मछली पालन ग्रामीण युवाओं के लिए अतिरिक्त आय के साथ-साथ स्थायी स्वरोजगार का जरिया बन सकता है।
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