चंडीगढ़: उत्तर भारत में धान की सरकारी खरीद तेज होने के बीच हरियाणा में बंपर पैदावार किसानों के लिए परेशानी बन गई है। मंडियों में भीड़, फसल उठाने में देरी और खरीद प्रक्रिया में रुकावटों के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए तीन से चार दिन और कई बार पांच से छह दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि प्रति एकड़ खरीद की सीमा, धान में अधिक नमी और न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत मिलने के कारण उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहीं, पड़ोसी पंजाब में भी नई फसल की आवक और सरकारी भंडार में पहले से मौजूद अनाज के कारण खरीद व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
हरियाणा में बंपर पैदावार, खरीद व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
ऑल इंडिया नेशनल किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता इंदरजीत सिंह गोराया के मुताबिक, इस साल हरियाणा में धान की औसत पैदावार 35 से 37 क्विंटल प्रति एकड़ तक रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में सरकारी खरीद के लिए प्रति एकड़ 25 क्विंटल की सीमा तय किए जाने से किसान अपनी पूरी उपज सरकारी व्यवस्था के तहत नहीं बेच पा रहे हैं। उनका कहना है कि जब खेतों में औसतन 35 से 37 क्विंटल धान पैदा हो रहा है, तो शेष 10 से 12 क्विंटल उपज बेचने के लिए किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों ने खरीद एजेंसियों के आवंटन, खरीद लक्ष्य की स्पष्ट जानकारी और मंडियों से धान का समय पर उठान सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।
नमी के कारण एमएसपी से कम कीमत मिलने की शिकायत
किसानों का आरोप है कि धान में नमी की मात्रा अधिक होने के कारण उनकी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य से 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत पर खरीदी जा रही है। इंदरजीत सिंह गोराया के अनुसार, वर्ष 2026-27 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, लेकिन कुछ स्थानों पर किसानों को 2,200 से 2,300 रुपये प्रति क्विंटल तक की कीमत मिलने की शिकायत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले वर्ष खरीदा गया धान अभी तक गोदामों से पूरी तरह नहीं हटाया गया है, जिससे नई फसल के भंडारण और उठान में बाधाएं आ रही हैं। हालांकि, खरीद में देरी, नमी के आधार पर कटौती और निर्धारित सीमा से जुड़े इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
पंजाब में भी धान खरीद को लेकर बढ़ सकती है परेशानी
हरियाणा के साथ पंजाब में भी धान की सरकारी खरीद व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पंजाब में वर्ष 2026-27 के खरीद सीजन के दौरान करीब 1.8 करोड़ टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि उत्पादन का अनुमान लगभग 1.9 करोड़ टन है। किसानों का कहना है कि इस साल अच्छी पैदावार के कारण वास्तविक उत्पादन दो करोड़ टन से भी अधिक हो सकता है। ऐसे में सरकारी खरीद, मिलिंग और भंडारण की व्यवस्था को बड़ी मात्रा में उपज संभालनी होगी। किसानों ने कुछ नई किस्मों में नमी की अधिक मात्रा को लेकर भी चिंता जताई है, खासकर उन परिस्थितियों में जब मशीनों से कटाई के बाद धान को निर्धारित नमी स्तर तक लाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
पंजाब में पहले से मौजूद चावल का बड़ा भंडार
केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक पंजाब में पिछली खरीद से लगभग 1.53 करोड़ टन चावल का भंडार मौजूद था। राज्य में वर्ष 2026-27 के दौरान करीब 1.8 करोड़ टन धान खरीदने की योजना है। मिलिंग के बाद इससे लगभग 1.206 करोड़ टन चावल प्राप्त होने का अनुमान है। वहीं, एक अगस्त 2026 तक पंजाब में केंद्र और राज्य सरकार की सुविधाओं को मिलाकर गेहूं और चावल की कुल भंडारण क्षमता लगभग 2.684 करोड़ टन बताई गई थी। 31 अगस्त तक राज्य में इन दोनों अनाजों का कुल भंडार करीब 2.764 करोड़ टन दर्ज किया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि नई फसल की आवक के बीच पुराने अनाज का उठान और भंडारण क्षमता का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।
हरियाणा में भी भंडारण क्षमता पर बढ़ा दबाव
हरियाणा में भी पिछले वर्षों के चावल का भंडार और नई फसल की खरीद व्यवस्था चिंता का विषय है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में वर्ष 2026-27 के लिए करीब 58 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य माना जा रहा है। मिलिंग के बाद इससे लगभग 38 लाख टन चावल मिलने का अनुमान है। केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक हरियाणा में पिछली खरीद से करीब 43 लाख टन चावल का भंडार मौजूद था। एक अगस्त तक राज्य में केंद्र और राज्य सरकार की सुविधाओं को मिलाकर गेहूं और चावल की कुल भंडारण क्षमता लगभग 1.394 करोड़ टन थी, जबकि 31 अगस्त को इन दोनों अनाजों का कुल भंडार लगभग 1.432 करोड़ टन दर्ज किया गया।
नई फसल के साथ अनाज के उठान की चुनौती
भंडारण से जुड़े ये आंकड़े नई खरीद शुरू होने से पहले की स्थिति दर्शाते हैं। इनमें सितंबर और अक्टूबर के दौरान पुराने स्टॉक में हुई कमी को शामिल नहीं किया गया है। इसके बावजूद पंजाब और हरियाणा में भंडारण क्षमता तथा अनाज के उठान को लेकर दबाव की आशंका बनी हुई है। विशेषज्ञों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार, धान का अधिक उत्पादन और बिक्री के सीमित विकल्प सरकारी खरीद व्यवस्था पर बोझ बढ़ा सकते हैं। ऐसे में मंडियों से समय पर उठान, खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, नमी के मानकों का उचित पालन और पुराने स्टॉक का तेजी से निपटान किसानों को राहत देने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
ये भी पढ़ें: गन्ने की नई किस्म सीओएस 23232 की बंपर मांग

