लखनऊ: यूपी के किसानों को आने वाले समय में सिंचाई के लिए पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में दो महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में राज्य की वित्तीय हिस्सेदारी को मंजूरी दे दी गई है। यह परियोजनाएं उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में निर्माणाधीन हैं, जिनसे उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों को सिंचाई और जल आपूर्ति में लाभ मिलेगा।
मंत्रिमंडल ने लखवार बहुउद्देशीय परियोजना और रेणुकाजी बांध परियोजना में उत्तर प्रदेश के हिस्से की धनराशि खर्च करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों को अतिरिक्त जल उपलब्ध हो सकेगा।
लखवार बहुउद्देशीय परियोजना को मिली मंजूरी
मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड के देहरादून और टिहरी गढ़वाल जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर बन रही लखवार बहुउद्देशीय परियोजना में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी के रूप में 356.07 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना की संशोधित लागत 5747.17 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
इस परियोजना के अंतर्गत 204 मीटर ऊंचा बांध, 300 मेगावाट क्षमता का भूमिगत बिजलीघर और एक बैराज के साथ संतुलन जलाशय का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना में लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन की जाने वाली कुल लागत 1146.69 करोड़ रुपये है, जिसमें उत्तर प्रदेश का जल उपयोग हिस्सा 31.05 प्रतिशत तय किया गया है।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित लाभार्थी राज्यों के लगभग 33,780 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए 78.83 मिलियन घन मीटर जल उपलब्ध होगा और 300 मेगावाट आकस्मिक बिजली उत्पादन की भी व्यवस्था की जाएगी। इस परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था और इसे दिसंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेणुकाजी बांध परियोजना में भी यूपी की हिस्सेदारी
मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में गिरी नदी पर बन रही रेणुकाजी बांध परियोजना में भी उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी के रूप में 361.04 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत 6946.99 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जबकि इसके जल घटक की लागत 6647.46 करोड़ रुपये है।
परियोजना के तहत 148 मीटर ऊंचा और 430 मीटर लंबा बांध बनाया जा रहा है। इस बांध की कुल जल संचयन क्षमता 498 मिलियन घन मीटर और जीवित भंडारण क्षमता 330 मिलियन घन मीटर होगी। इसके अलावा इस परियोजना से 40 मेगावाट बिजली उत्पादन का भी प्रस्ताव है।
इस परियोजना की लागत का एक हिस्सा लाभार्थी राज्य मिलकर वहन करेंगे, जिसमें उत्तर प्रदेश का जल उपयोग हिस्सा 31.05 प्रतिशत है। परियोजना के माध्यम से संग्रहित जल का उपयोग हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में सिंचाई के लिए किया जाएगा। इस परियोजना को वर्ष 2009 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था और इसे दिसंबर 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उत्तर प्रदेश को मिलेगा अतिरिक्त जल
इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश को कुल 3.721 अरब घन मीटर जल प्राप्त होगा, जो कुल जल उपयोग का 31.05 प्रतिशत हिस्सा होगा। इस अतिरिक्त जल का उपयोग पूर्वी यमुना नहर प्रणाली और आगरा नहर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई के लिए किया जाएगा। इसके अलावा इन परियोजनाओं से यमुना नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा, जिससे नदी की स्थिति में भी सुधार होने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा और कृषि उत्पादन को भी मजबूती मिलेगी।
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