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गुलदाउदी की खेती से कमाएं अच्छा मुनाफा, जानें किस्में और उत्पादन तकनीक

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नई दिल्ली: गुलदाउदी देश और दुनिया में उगाए जाने वाले प्रमुख फूलों में शामिल है। इसकी मांग धार्मिक आयोजनों, पूजा-पाठ, मालाएं बनाने, शादी-विवाह और सजावट के लिए बनी रहती है। यही वजह है कि भारत में गुलदाउदी की खेती व्यावसायिक स्तर पर की जाती है। गुलदाउदी की खेती कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में होती है। इसकी खेती खुले खेतों के साथ-साथ ग्रीनहाउस में भी की जा सकती है। नियंत्रित वातावरण में इसकी गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर किया जा सकता है। गुलदाउदी का पौधा सामान्यतः 50 से 150 सेंटीमीटर तक ऊंचा हो सकता है।

गुलदाउदी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी

गुलदाउदी की अच्छी पैदावार के लिए अनुकूल तापमान और उचित जल निकास वाली मिट्टी जरूरी है। उपलब्ध कृषि विवरण के अनुसार, इसकी खेती के लिए 18 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान, 80 से 100 सेंटीमीटर वर्षा और 16 से 25 डिग्री सेल्सियस का बुवाई तापमान उपयुक्त बताया गया है। फूल आने और कटाई के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल माना गया है। गुलदाउदी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है। मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए। खेत में पानी जमा होने से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए जल निकासी की उचित व्यवस्था जरूरी है।

गुलदाउदी की प्रमुख किस्में और उनकी पैदावार

गुलदाउदी की कई किस्में अलग-अलग रंग, आकार और उत्पादन क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं। किसान बाजार की मांग और अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुसार इनका चयन कर सकते हैं।

बिरबल साहनी और बग्गी

बिरबल साहनी किस्म लगभग 121 दिनों में तैयार होती है। इसके पौधे की ऊंचाई करीब 65 सेंटीमीटर होती है। इसमें सफेद रंग के फूल गुच्छों में लगते हैं और फूलों का व्यास 4 से 8 सेंटीमीटर होता है। इसकी औसत पैदावार लगभग 13 क्विंटल प्रति एकड़ बताई गई है। वहीं, बग्गी किस्म लगभग 137 दिनों में तैयार होती है। इसके पौधे की ऊंचाई 64 सेंटीमीटर और फूल सफेद रंग के होते हैं। इसकी औसत पैदावार लगभग 60 क्विंटल प्रति एकड़ बताई गई है।

रतलाम सिलेक्शन और पंजाब गोल्ड

रतलाम सिलेक्शन किस्म लगभग 138 दिनों में तैयार होती है। इसके पौधे की ऊंचाई करीब 51 सेंटीमीटर होती है और फूल हल्के पीले-सफेद रंग के होते हैं। फूलों का व्यास लगभग 8.1 सेंटीमीटर होता है। इसकी औसत पैदावार 72 क्विंटल प्रति एकड़ बताई गई है। पंजाब गोल्ड जल्दी तैयार होने वाली किस्म है, जो लगभग 76 दिनों में पक जाती है। इसके फूलों की कलियां लाल रंग की होती हैं, जबकि खिलने के बाद फूल आकर्षक पीले रंग के हो जाते हैं। यह किस्म गमलों में लगाने के लिए भी उपयुक्त है।

अनमोल और रॉयल पर्पल

अनमोल किस्म लगभग 114 दिनों में तैयार होती है। इसके पौधे की ऊंचाई करीब 50 सेंटीमीटर होती है और फूल पीले रंग के गुच्छों में लगते हैं। एक पौधे से लगभग 208 फूल प्राप्त हो सकते हैं। इसकी औसत पैदावार 13 क्विंटल प्रति एकड़ बताई गई है। रॉयल पर्पल देर से तैयार होने वाली किस्म है, जो लगभग 141 दिनों में पकती है। इसके फूल जामुनी-गुलाबी रंग के होते हैं। एक पौधे से करीब 201 फूल प्राप्त हो सकते हैं। यह गमलों में उगाने के लिए भी उपयुक्त है।

येलो डिलाइट और गार्डन ब्यूटी

येलो डिलाइट जल्दी तैयार होने वाली किस्म है। इसके पौधे की ऊंचाई लगभग 66 सेंटीमीटर होती है और फूल आकर्षक पीले रंग के होते हैं। यह लगभग 88 दिनों में तैयार होती है और एक पौधे से करीब 103 फूल प्राप्त होते हैं। गार्डन ब्यूटी मध्यम अवधि में तैयार होने वाली किस्म है। इसके पौधे की ऊंचाई करीब 70 सेंटीमीटर और फूलों का व्यास लगभग 10 सेंटीमीटर होता है। एक पौधे से करीब 73 फूल प्राप्त हो सकते हैं।

विंटर क्वीन और एटम जॉय

विंटर क्वीन किस्म लगभग 128 दिनों में तैयार होती है। इसके पौधे की ऊंचाई करीब 75 सेंटीमीटर होती है और एक पौधे से लगभग 125 फूल प्राप्त हो सकते हैं। वहीं, एटम जॉय लगभग 101 दिनों में तैयार होने वाली किस्म है। इसके फूल गुलाबी रंग के होते हैं और पौधे की ऊंचाई करीब 58 सेंटीमीटर होती है। एक पौधे से लगभग 283 फूल प्राप्त हो सकते हैं।

अन्य प्रमुख किस्में

गुलदाउदी की दूसरी लोकप्रिय किस्मों में केल्विन मैंड्रिन, केल्विन टैटू, रीगन व्हाइट, रीगन एम्परर, येलो चार्म, अजय और मदर टेरेसा शामिल हैं। इनके अलावा अर्का स्वर्णा, शांति, वाई-2-के, अर्का गंगा, अप्पू, सद्भावना, बिंदिया, एमडीयू-1, सीओ-1, सीओ-2, इंदिरा, रेड गोल्ड, रवि किरण, आकाश, येलो स्टार, राखी और चंद्रकांत जैसी किस्में भी उगाई जाती हैं।

खेत की तैयारी और रोपाई का सही समय

गुलदाउदी की खेती के लिए खेत की अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए। मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए हैरो से 2 से 3 बार जुताई की जा सकती है। अंतिम जुताई के समय 8 से 10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति एकड़ खेत में मिलाने की सलाह दी जाती है। इसकी रोपाई के लिए फरवरी से मार्च के बीच जड़ों या गांठों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, पौधों की अंतिम टहनियों से तैयार कटिंग की रोपाई जून से जुलाई के दौरान की जा सकती है। कतार से कतार और पौधे से पौधे की दूरी 30×30 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी जाती है।

पौधों का प्रजनन और बीज उपचार

गुलदाउदी का प्रजनन मुख्य रूप से जड़ों और तने की कटिंग से किया जाता है। स्वस्थ पौधों से 4 से 5 सेंटीमीटर लंबी ऊपरी टहनियां काटकर नई पौध तैयार की जा सकती है। उपलब्ध कृषि विवरण के अनुसार, कटिंग को लगाने से पहले सीरेसन या कैप्टान के 0.2 प्रतिशत घोल से उपचारित करने की सलाह दी गई है। प्रति एकड़ लगभग 45 हजार पौधों का घनत्व रखा जा सकता है।

खाद और उर्वरक प्रबंधन

अच्छे फूल उत्पादन के लिए गुलदाउदी की फसल में संतुलित पोषण देना जरूरी है। उपलब्ध सिफारिश के अनुसार, प्रति एकड़ 160 किलोग्राम यूरिया, 500 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट और 133 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश का उपयोग बताया गया है। हालांकि, उर्वरकों की वास्तविक मात्रा मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय की सिफारिश के आधार पर तय करनी चाहिए।

खरपतवार नियंत्रण और सिंचाई

गुलदाउदी के पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए खेत को खरपतवार मुक्त रखना जरूरी है। इसके लिए 2 से 3 बार हाथ से निराई-गुड़ाई की जा सकती है। पहली निराई-गुड़ाई रोपाई के लगभग चार सप्ताह बाद करने की सलाह दी जाती है।

सिंचाई की जरूरत मौसम, मिट्टी और पौधों की विकास अवस्था पर निर्भर करती है। शुरुआती महीने में सप्ताह में दो बार सिंचाई की जा सकती है। इसके बाद आवश्यकतानुसार लगभग एक सप्ताह के अंतराल पर पानी देना चाहिए। खेत में जलभराव नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों के खराब होने और पौधों में बीमारियां आने का खतरा बढ़ सकता है। गुलदाउदी की व्यावसायिक खेती शुरू करने से पहले बाजार की मांग, फूलों के रंग और आकार की पसंद तथा स्थानीय जलवायु के अनुसार किस्म का चयन करें। उर्वरक और पौध संरक्षण संबंधी उपाय अपनाने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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