नई दिल्ली: डेयरी व्यवसाय की सफलता एक स्वस्थ बछड़े या बछिया के जन्म से शुरू होती है। जन्म के बाद के शुरुआती मिनट और सप्ताह उसके जीवन की नींव रखते हैं। इस दौरान सांस की जांच करना, नाक-मुंह से झिल्ली हटाना और शरीर को साफ-सूखा रखना सबसे जरूरी है। अगर गाय बच्चे को न चाटे, तो तौलिए से सुखाना आवश्यक है। बछड़े को ठंडी हवा से बचाकर साफ और सूखी जगह पर रखना चाहिए।
स्वस्थ बछिया ही बनेगी भविष्य की दूधारू गाय
मां का पहला गाढ़ा पीला दूध यानी खीस, नवजात के लिए सबसे पौष्टिक और रोग-प्रतिरोधक आहार है। इसमें मौजूद एंटीबॉडी नवजात को संक्रामक रोगों से बचाते हैं। बछड़े को जन्म के आधे से दो घंटे के भीतर खीस अवश्य पिलाना चाहिए। यही आगे चलकर उसे अधिक दूध देने वाली गाय बनने में मदद करता है।
नाभि संक्रमण से बचाव जरूरी
जन्म के तुरंत बाद नाभि को 2-3 इंच की दूरी पर काटकर एंटीसेप्टिक घोल से साफ करना चाहिए। नाभि में सूजन, मवाद, बुखार या सुस्ती संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत पशु चिकित्सक से उपचार कराना चाहिए।
खान–पान और पोषण के नियम
एक सामान्य नियम के अनुसार, बछड़े को उसके वजन का 10% दूध प्रतिदिन पिलाना चाहिए। जैसे 30 किलो के बछड़े को दिनभर में 3 लीटर दूध देना जरूरी है। दूध को एक बार में नहीं बल्कि 2-3 बार में बांटकर पिलाएं। जन्म के 24 घंटे के भीतर पहला गाढ़ा गोबर निकलना चाहिए। यदि ऐसा न हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
सींग रोधन और रोगों से बचाव
बछड़े की 15 दिन की उम्र के भीतर सींग हटाना बेहतर रहता है। यह आगे प्रबंधन और सुरक्षा के लिए फायदेमंद है। दस्त, निमोनिया और जोड़ों के संक्रमण से बचाने के लिए साफ-सफाई और समय पर खीस पिलाना बेहद जरूरी है। किसी भी बीमारी के लक्षण दिखते ही पशु चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
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