नई दिल्ली: लौकी की खेती करने वाले किसानों के लिए सही किस्म का चयन अच्छी पैदावार और बेहतर गुणवत्ता हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अलग-अलग किस्मों में पौधों की ऊंचाई, फल का आकार, गूदे का रंग, मिठास और उत्पादन क्षमता में अंतर होता है। कुछ किस्में बड़े और मीठे फल देती हैं, जबकि कुछ कम बीज और विशेष गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। किसानों को किस्म का चयन करते समय अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और बाजार की मांग को ध्यान में रखना चाहिए।
लौकी की प्रमुख किस्में और उनकी विशेषताएं
रेड लेडी
रेड लेडी किस्म वर्ष 2013 में जारी की गई थी। इसके पौधों की वृद्धि तेजी से होती है और पौधे की ऊंचाई लगभग 238 सेंटीमीटर बताई गई है। करीब 86 सेंटीमीटर ऊंचाई होने पर पौधे में फल लगने शुरू हो जाते हैं। इसके फल मध्यम आकार के, लंबे से अंडाकार होते हैं। गूदा लाल रंग का और स्वादिष्ट होता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इसकी औसत पैदावार लगभग 50 किलोग्राम है। इस किस्म को कीटों और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक बताया गया है।
पंजाब स्वीट
पंजाब स्वीट किस्म वर्ष 1993 में जारी की गई थी। इसके पौधे की ऊंचाई लगभग 190 सेंटीमीटर होती है और करीब 100 सेंटीमीटर ऊंचाई पर फल लगने लगते हैं। इसके फल बड़े और लंबे आकार के होते हैं। गूदे का रंग गहरा पीला होता है। फलों में कुल घुलनशील ठोस पदार्थों की मात्रा 9 से 10.5 प्रतिशत तक बताई गई है। इसकी औसत पैदावार लगभग 50 किलोग्राम प्रति पौधा है। यह किस्म सिट्रस जूं के प्रति कम संवेदनशील बताई गई है।
पूसा डिलीशियस
पूसा डिलीशियस किस्म वर्ष 1992 में जारी की गई थी। इसके पौधे की ऊंचाई लगभग 210 सेंटीमीटर होती है और करीब 110 सेंटीमीटर ऊंचाई पर फल लगने शुरू हो जाते हैं। इसके फल मध्यम से बड़े आकार के और लंबे से अंडाकार होते हैं। गूदा गहरे संतरी रंग का तथा स्वाद में अच्छा होता है। फलों में कुल घुलनशील ठोस पदार्थों की मात्रा 8 से 10 प्रतिशत तक होती है। इसकी औसत पैदावार लगभग 46 किलोग्राम प्रति पौधा बताई गई है।
पूसा ड्वार्फ
पूसा ड्वार्फ वर्ष 1992 में जारी की गई कम ऊंचाई वाली किस्म है। इसके पौधे की ऊंचाई लगभग 165 सेंटीमीटर होती है और करीब 100 सेंटीमीटर ऊंचाई पर फल लगने लगते हैं। इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं। गूदा संतरी रंग का होता है तथा कुल घुलनशील ठोस पदार्थों की मात्रा 8 से 10 प्रतिशत तक बताई गई है। इसकी औसत पैदावार लगभग 35 किलोग्राम प्रति पौधा है।
हनी ड्यू
हनी ड्यू किस्म वर्ष 1975 में जारी की गई थी। इसे मधु बिंदु के नाम से भी जाना जाता है। इसके पौधे मध्यम ऊंचाई के होते हैं। फल बड़े और लंबे आकार के होते हैं तथा इनमें बीज अपेक्षाकृत कम पाए जाते हैं। इसका गूदा साफ, मीठा और स्वादिष्ट होता है। मीठे फलों की मांग वाले बाजारों के लिए यह किस्म उपयोगी हो सकती है।
वाशिंगटन
वाशिंगटन किस्म के फल बड़े होते हैं और इनमें बीज कम पाए जाते हैं। इसके गूदे का रंग पीला तथा स्वाद मीठा होता है। पौधे अपेक्षाकृत छोटे आकार के होते हैं। उपलब्ध विवरण में नर और मादा पौधों के आकार में अंतर का भी उल्लेख किया गया है।
कूर्ग हनी
कूर्ग हनी किस्म के फल बड़े होते हैं और उनमें बीजों की मात्रा कम होती है। इसकी मिठास हनी ड्यू की तुलना में कम बताई गई है। इसके पौधे बड़े आकार के होते हैं तथा नर और मादा फूल एक ही पौधे पर पाए जाते हैं।
सीओ-2
सीओ-2 किस्म में बड़े आकार के फल लगते हैं, जबकि पौधे की ऊंचाई मध्यम रहती है। इसके अलावा सीओ-1, सीओ-3, सोलो, पूसा नन्हा, रांची सिलेक्शन, कूर्ग ग्रीन सनराइज सोलो, ताइवान और कूर्ग ग्रीन जैसी किस्में भी अलग-अलग क्षेत्रों में उगाई जाती हैं।
किस्म का चयन करते समय रखें ध्यान
लौकी की खेती के लिए किस्म चुनते समय किसानों को फल के आकार, स्वाद, बाजार की मांग, स्थानीय जलवायु और रोगों के प्रति सहनशीलता पर ध्यान देना चाहिए। अलग-अलग किस्मों की पैदावार क्षेत्र और खेती की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। इसलिए बीज खरीदने से पहले स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से किस्म की उपयुक्तता और प्रमाणित बीज की उपलब्धता की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।
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