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बिहार में सहकारिता प्रशिक्षण व्यवस्था होगी आधुनिक, पूसा बनेगा उत्कृष्ट केंद्र

Cooperative. pusa bihar

पटना: बिहार सरकार सहकारिता व्यवस्था को मजबूत, आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण और शोध के बुनियादी ढांचे को विकसित कर रही है। समस्तीपुर के पूसा स्थित सहकारिता प्रशिक्षण केंद्र को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से केंद्र का कायाकल्प किया जा रहा है। इसके साथ ही दक्षिण बिहार में गया जिले के डोभी प्रखंड में नया सहकारिता प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान स्थापित करने के लिए 10.38 एकड़ भूमि का आवंटन किया जा चुका है। सरकार का उद्देश्य सहकारिता विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से लेकर प्राथमिक कृषि साख समितियों के प्रतिनिधियों तक सभी को बेहतर और आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि सहकारी संस्थाओं को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे के साथ मानव संसाधन की क्षमता बढ़ाना भी जरूरी है।

पूसा में 19 करोड़ रुपये से बदलेगी प्रशिक्षण व्यवस्था

समस्तीपुर के पूसा स्थित सहकारिता प्रशिक्षण केंद्र का करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से व्यापक विकास किया जा रहा है। यहां अत्याधुनिक प्रशासनिक भवन के साथ पुस्तकालय, स्मार्ट कक्षाएं, सामुदायिक कक्ष, व्यायामशाला, प्राचार्य कक्ष और संकाय सदस्यों के आवास तैयार किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण के लिए एक ही परिसर में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। नए परिसर में प्रशिक्षण, अध्ययन, अभ्यास और रहने की सुविधाओं को एक साथ विकसित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि सहकारिता व्यवस्था में लगातार बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में विभाग से जुड़े लोगों को नई व्यवस्थाओं, तकनीकों और प्रबंधन के तरीकों की जानकारी देने के लिए आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र जरूरी हैं।

उत्तर बिहार के लिए महत्वपूर्ण होगा पूसा केंद्र

पूसा में विकसित किया जा रहा केंद्र उत्तर बिहार के अधिकारियों, कर्मचारियों और सहकारी संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों की प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आधुनिक कक्षाओं और अध्ययन सुविधाओं के माध्यम से प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लोगों को अपने कार्यक्षेत्र में नई व्यवस्थाओं को लागू करने में आसानी हो सकती है।

डोभी में बनेगा सहकारिता प्रशिक्षण और शोध संस्थान

दक्षिण बिहार में प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार करने के लिए गया जिले के डोभी प्रखंड में नया सहकारिता प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान स्थापित किया जाएगा। इसके लिए 10.38 एकड़ भूमि आवंटित की जा चुकी है। पूसा जहां उत्तर बिहार की प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा, वहीं डोभी को दक्षिण बिहार के अधिकारियों, कर्मचारियों और प्राथमिक कृषि साख समिति प्रतिनिधियों के लिए प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। दोनों संस्थानों के विकसित होने के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों से प्रशिक्षण लेने वाले लोगों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी। साथ ही प्रशिक्षण के साथ शोध गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली में सुधार की उम्मीद है।

प्रशिक्षण के साथ शोध पर भी रहेगा जोर

डोभी में प्रस्तावित संस्थान में प्रशिक्षण के साथ शोध गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे बिहार में सहकारिता क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं और जरूरतों के आधार पर समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है। शोध के माध्यम से तैयार किए गए बेहतर मॉडल को सहकारी संस्थाओं में लागू करने का अवसर मिलेगा। इससे प्रशिक्षण और जमीनी कार्य के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा।

प्राथमिक कृषि साख समितियों तक पहुंचेगा प्रशिक्षण

सरकार अब प्रशिक्षण व्यवस्था को केवल विभागीय अधिकारियों तक सीमित रखने के बजाय प्राथमिक कृषि साख समिति स्तर तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। सभी प्राथमिक कृषि साख समिति सदस्यों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रशिक्षक तैयार करने की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य समिति के सदस्यों और पदाधिकारियों को सहकारिता के कामकाज, प्रबंधन, लेखा-जोखा और नई व्यवस्थाओं की बेहतर जानकारी देना है। गांव स्तर पर सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए यह जरूरी है कि उनसे जुड़े लोगों को संस्था के नियमों और कार्यप्रणाली की स्पष्ट समझ हो। प्रशिक्षक आधारित व्यवस्था के माध्यम से एक बार प्रशिक्षित किए गए लोग अपने क्षेत्र के अन्य सदस्यों को भी जानकारी दे सकेंगे।

गांव स्तर पर बढ़ेगी प्रशिक्षण की पहुंच

प्रशिक्षक आधारित व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि प्रशिक्षण का दायरा तेजी से बढ़ाया जा सके। एक प्रशिक्षित व्यक्ति अपने क्षेत्र के कई अन्य सदस्यों तक जानकारी पहुंचा सकता है। इससे प्राथमिक कृषि साख समितियों के सदस्यों में प्रबंधन क्षमता बढ़ाने और सहकारी संस्थाओं के कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

420 अधिकारियों और 300 प्रतिनिधियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

सहकारिता विभाग के 420 सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों और 300 प्राथमिक कृषि साख समिति अध्यक्षों या प्रबंधकों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण कराया जा रहा है। इन अधिकारियों और प्रतिनिधियों को गुजरात के आनंद स्थित त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय, पुणे स्थित वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान और गुरुग्राम स्थित लक्ष्मणराव इनामदार राष्ट्रीय सहकारी अनुसंधान एवं विकास अकादमी जैसे संस्थानों में भेजा जा रहा है। यहां उन्हें बेहतर सहकारी प्रबंधन, आधुनिक कार्यप्रणाली और सफल सहकारी मॉडल का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण के बाद प्राप्त अनुभव को अपने जिले और प्राथमिक कृषि साख समिति के स्तर पर लागू करने का प्रयास किया जाएगा।

दूसरे राज्यों के सफल मॉडलों से मिलेगा अनुभव

देश के दूसरे हिस्सों में सहकारी संस्थाओं द्वारा अपनाई जा रही सफल व्यवस्थाओं को समझने से बिहार के अधिकारियों और सहकारी प्रतिनिधियों को नई कार्यप्रणाली सीखने का अवसर मिलेगा। इस अनुभव को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू करने पर सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन और कामकाज में सुधार किया जा सकता है। इससे प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल जानकारी हासिल करने तक सीमित न रहकर उसे जमीनी स्तर पर लागू करने तक पहुंच सकेगा।

बुनियादी ढांचे और क्षमता निर्माण पर एक साथ जोर

बिहार सरकार सहकारिता क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास और मानव संसाधन की क्षमता बढ़ाने को एक साथ आगे बढ़ा रही है। पूसा में आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र का विकास, डोभी में नए प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान की स्थापना और प्राथमिक कृषि साख समिति स्तर तक प्रशिक्षण पहुंचाने की योजना इसी दिशा में उठाए जा रहे कदम हैं। इसके साथ ही अधिकारियों और समिति प्रतिनिधियों को देश के प्रतिष्ठित सहकारी संस्थानों का अनुभव दिलाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि यदि आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किया जाए तो सहकारी संस्थाएं किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकती हैं। पूसा और डोभी में विकसित किए जा रहे संस्थान आने वाले समय में बिहार की सहकारिता व्यवस्था में प्रशिक्षण, शोध और क्षमता निर्माण के महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं।

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