नई दिल्ली, 04 अगस्त 2026: केंद्र सरकार ने मूल्य समर्थन योजना के तहत जायद मूंग और उड़द की खरीद प्रक्रिया को किसानों के लिए अधिक सरल बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब यदि किसी किसान का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन बार-बार विफल हो जाता है, तो वह अपने नामित प्रतिनिधि के माध्यम से अपनी फसल बेच सकेगा। सरकार का कहना है कि इस निर्णय से उन किसानों को राहत मिलेगी जो तकनीकी कारणों से अपनी उपज बेचने से वंचित रह जाते थे।
कृषि मंत्री ने दी नई व्यवस्था की जानकारी
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को सामाजिक माध्यम के जरिए इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि कई किसानों की शिकायतें मिल रही थीं कि बार-बार प्रयास करने के बावजूद उनके फिंगरप्रिंट का सत्यापन नहीं हो पा रहा था। इसके कारण वे अपनी मूंग और उड़द की उपज सरकारी खरीद केंद्रों पर बेच नहीं पा रहे थे। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने विशेष व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत पात्र किसान अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से फसल बिक्री की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
प्रतिनिधि के माध्यम से फसल बिक्री के लिए तय किए गए सख्त नियम
कृषि मंत्रालय के अनुसार यह सुविधा केवल उन्हीं मामलों में उपलब्ध होगी, जहां बायोमेट्रिक सत्यापन के सभी निर्धारित प्रयास विफल हो जाएं। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया के दौरान किसान का स्वयं खरीद केंद्र पर उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। प्रतिनिधि को अनुमति देने से पहले किसान की पहचान का सत्यापन किया जाएगा।
प्रतिनिधि को पूरी करनी होगी यह प्रक्रिया
फसल बिक्री की प्रक्रिया पूरी करने के लिए नामित प्रतिनिधि को आधार आधारित एक बार उपयोग होने वाला कूट, बायोमेट्रिक सत्यापन तथा अपनी तस्वीर का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फसल बिक्री का पूरा भुगतान केवल किसान के पंजीकृत बैंक खाते में ही भेजा जाएगा। किसी भी परिस्थिति में भुगतान प्रतिनिधि के बैंक खाते में नहीं किया जाएगा।
फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत
कृषि मंत्रालय ने बताया कि इस व्यवस्था का दुरुपयोग रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। किसान की पहचान और तस्वीर का सत्यापन अनिवार्य रहेगा तथा यह सुविधा केवल वास्तविक और विशेष परिस्थितियों में ही उपलब्ध कराई जाएगी।
भविष्य में आएगी नई पहचान प्रणाली
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि भविष्य में फिंगरप्रिंट सत्यापन से जुड़ी समस्याओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए नई तकनीकों पर भी काम किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश सरकार और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों को चेहरे की पहचान तथा आंखों की पुतली की पहचान आधारित वैकल्पिक सत्यापन प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि नई तकनीक लागू होने के बाद किसानों को खरीद केंद्रों पर और अधिक सुविधा मिलेगी तथा फसल बिक्री की प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बन सकेगी।
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