नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026: केंद्र सरकार की कृषि और व्यापार नीतियों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा ने देशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। राजधानी दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय सम्मेलन में किसान संगठनों ने घोषणा की कि 10 अगस्त को देशभर के लगभग 1,000 स्थानों पर भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते सहित अन्य मुक्त व्यापार समझौतों के विरोध में प्रदर्शन किए जाएंगे। आंदोलन के दौरान कई राज्यों में जेल भरो, रेल रोको और सड़क रोको जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने की तैयारी है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
किसान नेताओं ने आंदोलन तेज करने का किया आह्वान
सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उन्होंने किसानों से गांव-गांव तक अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को आंदोलन से जोड़ने की अपील की। सम्मेलन में विभिन्न किसान संगठनों ने संयुक्त रणनीति के साथ आगे बढ़ने पर सहमति जताई।
सात प्रमुख मांगों पर बनी सहमति
सम्मेलन में किसान संगठनों ने सात प्रमुख मांगों को लेकर साझा प्रस्ताव पारित किया। इनमें भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते का विरोध, अन्य मुक्त व्यापार समझौतों की समीक्षा या समाप्त करने की मांग, सभी फसलों पर लागत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, किसानों और ग्रामीण मजदूरों की संपूर्ण कर्जमाफी, आत्महत्या करने वाले किसान परिवारों को आर्थिक सहायता, बिजली के निजीकरण का विरोध तथा बीज कानून और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में प्रस्तावित संशोधनों का विरोध शामिल है।
17 अगस्त को सौंपा जाएगा मांग पत्र
संयुक्त किसान मोर्चा ने निर्णय लिया है कि 17 अगस्त को संगठन का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, विपक्ष के नेताओं, सांसदों और विधायकों को मांग पत्र सौंपेगा। किसान संगठन चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई करे और किसानों से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान निकाले।
छात्र संगठनों ने भी जताया समर्थन
सम्मेलन में एक छात्र संगठन ने भी किसान आंदोलन के समर्थन की घोषणा की। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि छात्र और किसान जनहित के मुद्दों पर मिलकर संघर्ष करेंगे। उन्होंने हाल के छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए किसानों के साथ एकजुटता बनाए रखने की बात कही।
26 नवंबर से बड़े आंदोलन की तैयारी
संयुक्त किसान मोर्चा ने आगामी महीनों के लिए व्यापक आंदोलन की रणनीति भी घोषित की है। इसके तहत राज्यों में सम्मेलन, पदयात्राएं, ट्रैक्टर मार्च और ग्राम महापंचायतों का आयोजन किया जाएगा। 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी शहीद दिवस के अवसर पर ग्राम महापंचायतें आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इसके बाद 26 नवंबर 2026 से नई दिल्ली सहित देशभर के लगभग 100 स्थानों पर बड़े किसान मार्च और लंबे आंदोलन की तैयारी शुरू की जाएगी।
सरकार से पुराने आश्वासन पूरे करने की मांग
किसान संगठनों का कहना है कि यदि केंद्र सरकार किसानों से पूर्व में किए गए लिखित आश्वासनों, विशेष रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य और कर्जमाफी से जुड़े वादों को लागू नहीं करती है, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। सम्मेलन में किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों की स्मृति में स्मारक बनाने तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए प्रभावी सार्वजनिक बीमा व्यवस्था लागू करने की मांग से जुड़े प्रस्ताव भी पारित किए गए।
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