कृषि समाचार

छत्तीसगढ़ में बढ़ा भूजल, किसानों को बड़ी राहत

Groundwater level rises in Chhattisgarh, big relief for farmers

राजनांदगांव, 27 जुलाई 2026: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से जल संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक सफलता सामने आई है। जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, ‘मिशन जल रक्षा’ के अंतर्गत किए गए वैज्ञानिक प्रयासों के परिणामस्वरूप जिले में भूजल स्तर में औसतन 2.04 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। यह पहल केंद्र सरकार के ‘कैच द रेन’ अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण कर उसे भूमि के भीतर पहुंचाना और भूजल भंडार को पुनर्भरित करना है। इस उपलब्धि से किसानों को सिंचाई के लिए अधिक पानी मिलने की उम्मीद है, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी।

जल संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर किए गए कार्य

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, राजनांदगांव जिले के 662 गांवों में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। इसके तहत 60 हजार से अधिक जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया गया। इसके अलावा 500 से अधिक अनुपयोगी नलकूपों को पुनर्भरण शाफ्ट में परिवर्तित किया गया, ताकि वर्षा का पानी सीधे भूमि के भीतर पहुंच सके। जिले में 1,700 से अधिक छोटे परकुलेशन टैंक भी बनाए गए हैं, जो वर्षा जल को भूमि में समाहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही 600 से अधिक इंजेक्शन कुओं का निर्माण किया गया, जबकि 2,500 से अधिक तालाबों और अन्य जल स्रोतों का भौगोलिक चिन्हांकन किया गया है। इससे इन जल स्रोतों की नियमित निगरानी और बेहतर रखरखाव सुनिश्चित किया जा सकेगा।

वैज्ञानिक तकनीकों का मिला भरपूर लाभ

इस अभियान में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया गया। भौगोलिक सूचना प्रणाली, दूरसंवेदी तकनीक, भूजल भंडार मानचित्रण, डिजिटल ऊंचाई मॉडल तथा पहाड़ी से घाटी तक आधारित योजना के माध्यम से उन क्षेत्रों की पहचान की गई, जहां भूजल पुनर्भरण की सबसे अधिक संभावना थी। इन तकनीकों ने जल संरक्षण कार्यों को अधिक प्रभावी और परिणामकारी बनाया।

रोजगार के साथ बढ़ी ग्रामीण आय

जल संरक्षण अभियान केवल पानी बचाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए। मंत्रालय के अनुसार, इस पहल के माध्यम से 51 लाख से अधिक मानव-दिवस का रोजगार सृजित हुआ। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिला।

अब वर्षा का पानी नहीं होगा व्यर्थ

अभियान के तहत तैयार की गई संरचनाओं के कारण वर्षा का पानी बहकर नष्ट होने के बजाय सीधे भूमि के भीतर पहुंच रहा है। विशेष रूप से कठोर चट्टानी क्षेत्रों में पुनर्भरण शाफ्ट, इंजेक्शन कुएं और परकुलेशन टैंकों के माध्यम से पानी को गहरे भूजल भंडार तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इससे भविष्य में जल संकट की स्थिति से निपटने में भी मदद मिलेगी।

जनभागीदारी बनी सबसे बड़ी ताकत

‘मिशन जल रक्षा’ की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि यह केवल सरकारी योजना बनकर नहीं रह गया, बल्कि जनभागीदारी का व्यापक अभियान बन गया। किसानों, महिलाओं, युवाओं, ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदाय ने जल संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय योगदान दिया। लोगों ने जल बजट तैयार करने, जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेने और पानी बचाने की आदतों को अपनाकर इस अभियान को सफल बनाया।

कम पानी वाली खेती की ओर बढ़े किसान

मंत्रालय के अनुसार, किसानों ने फसल विविधीकरण को भी अपनाया है। गर्मी के मौसम में होने वाली धान की खेती का लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र अब कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की ओर स्थानांतरित हो चुका है। इससे भूजल पर दबाव कम हुआ है और खेती अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बन रही है।

दूसरे राज्यों के लिए प्रेरणा बना मॉडल

जल शक्ति मंत्रालय का मानना है कि राजनांदगांव का यह मॉडल दर्शाता है कि वर्षा जल संरक्षण केवल एक मौसमी गतिविधि नहीं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा का मजबूत आधार है। वैज्ञानिक तकनीकों, प्रभावी योजना और जनभागीदारी के समन्वय से तैयार यह मॉडल अब देश के अन्य जिलों और राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जहां जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में इसी प्रकार के प्रयास किए जा सकते हैं।

ये भी पढ़ें: Agri Tech: खेती में AI तकनीक से होगा बड़ा फायदा

Related posts

Leave a Comment