नई दिल्ली: बरसात का मौसम शुरू होते ही भेड़ और बकरी पालन करने वाले पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पशुओं की ग्रोथ बनाए रखने की होती है। अक्सर देखा जाता है कि इस मौसम में पर्याप्त चारा और खुराक देने के बावजूद भेड़-बकरियों का वजन अपेक्षित गति से नहीं बढ़ता। इसका सबसे बड़ा कारण दूषित पानी और साफ-सफाई की कमी मानी जाती है। खासकर मांस उत्पादन के लिए पाले जाने वाले बकरों में वजन बढ़ना सीधे पशुपालकों की आय से जुड़ा होता है, इसलिए इस मौसम में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
गंदा पानी रोक सकता है बकरियों की ग्रोथ
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भेड़-बकरियों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी नहीं मिलता तो वे जल्दी बीमार पड़ सकती हैं। बरसात के मौसम में पानी के स्रोत आसानी से दूषित हो जाते हैं, जिससे संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पशुओं की बढ़वार रुक जाती है और उनका वजन भी अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ पाता। इसलिए पशुपालकों को पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
पशुपालन मंत्रालय ने दी स्वच्छ पानी पिलाने की सलाह
पशुपालन और डेयरी मंत्रालय समय-समय पर पशुपालकों को जागरूक करने के लिए विभिन्न अभियान चलाता है। मंत्रालय के अनुसार, पशुओं को हमेशा ताजा और साफ पानी ही पिलाना चाहिए। जिस बर्तन या स्थान से पशु पानी पीते हैं, उसे प्रतिदिन खाली कर अच्छी तरह साफ करना चाहिए। यदि उसमें काई, गंदगी या अन्य अशुद्धियां जमा हो गई हों तो उन्हें पूरी तरह हटाने के बाद ही ताजा पानी भरना चाहिए। मंत्रालय का यह भी कहना है कि ठंड के मौसम में रातभर खुले में रखा अत्यधिक ठंडा पानी पशुओं को नहीं पिलाना चाहिए। इसके बजाय ताजा निकला स्वच्छ पानी देना अधिक लाभकारी होता है।
शरीर में पानी की कमी के ये हैं प्रमुख संकेत
पशुओं के शरीर में पानी की कमी होने पर कई स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगते हैं। ऐसे पशुओं की भूख कम हो जाती है, वे सुस्त और कमजोर दिखाई देते हैं। उनका मूत्र अधिक गाढ़ा हो जाता है, वजन घटने लगता है और आंखों में सूखापन नजर आने लगता है। इसके अलावा चमड़ी रूखी और खुरदरी हो जाती है तथा दूध देने वाले पशुओं का दुग्ध उत्पादन भी कम हो सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पानी की कमी की पहचान का एक आसान तरीका यह है कि यदि पशु की चमड़ी को उंगलियों से हल्का ऊपर उठाने पर वह सामान्य स्थिति में लौटने में अधिक समय लेती है, तो यह शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत स्वच्छ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और आवश्यकता पड़ने पर पशु चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।
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