कृषि समाचार

गन्ना किसानों का बकाया 32 गुना बढ़ा, संकट गहराया

sugarcane farmers

नई दिल्ली: देशभर के गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर संसद की उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण समिति की ताजा रिपोर्ट ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। समिति के अनुसार चीनी मिलों पर किसानों का बकाया पिछले एक वर्ष में 32 गुना तक बढ़ गया है। जहां वर्ष 2023-24 में यह बकाया मात्र 34 करोड़ रुपये और 2024-25 में 497 करोड़ रुपये था, वहीं 16 फरवरी 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 16,087 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।

राज्यों में तेजी से बढ़ा बकाया भुगतान

रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक में बकाया राशि शून्य से बढ़कर 4,956 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। महाराष्ट्र में 4,252 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश में 3,287 करोड़ रुपये और गुजरात में 1,402 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। इसके अलावा पंजाब में 535 करोड़, हरियाणा में 373 करोड़, मध्य प्रदेश में 366 करोड़, उत्तराखंड में 235 करोड़, बिहार में 212 करोड़, तमिलनाडु में 203 करोड़ और तेलंगाना में 152 करोड़ रुपये किसानों के फंसे हुए हैं।

किसानों के सामने बढ़ती मुश्किलें

किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि नई फसल का समय नजदीक आ चुका है, लेकिन पिछली फसल का भुगतान अभी तक नहीं मिला है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है और खेती की तैयारी प्रभावित हो रही है। बढ़ती लागत और फसलों में बीमारी के कारण पहले से ही परेशान किसान अब बकाया भुगतान के कारण और संकट में आ गए हैं।

मिलों ने बताई नकदी की कमी

चीनी मिल मालिकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में गिरावट और निर्यात में कमी के कारण उनके पास नकदी की भारी कमी हो गई है। मिलों के पास चीनी का बड़ा भंडार जमा है, जिसे बेच पाना मुश्किल हो रहा है। इसी कारण किसानों का भुगतान समय पर नहीं हो पा रहा है।

उत्पादन ज्यादा, खपत कम बना कारण

विशेषज्ञों के अनुसार देश में हर वर्ष चीनी का उत्पादन खपत से अधिक होता है। जहां उत्पादन 300 से 330 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है, वहीं खपत 270 से 290 लाख मीट्रिक टन के बीच रहती है। इस अतिरिक्त उत्पादन के कारण मिलों की पूंजी फंस जाती है और भुगतान में देरी होती है।

समाधान के प्रयास, लेकिन असर सीमित

सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए चीनी के बजाय इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने और चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं। हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि जब तक किसानों को उनका बकाया भुगतान नहीं मिलता, तब तक ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं। कुल मिलाकर, गन्ना किसानों का बढ़ता बकाया भुगतान कृषि क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इससे किसानों की आय और गन्ना उत्पादन दोनों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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