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2026 में यूपी को 14.96 लाख टन मीट उत्पादन का लक्ष्य

UP in 2026 meat production

नई दिल्ली: भारत में मीट उत्पादन सिर्फ कृषि और पशुपालन का विषय नहीं है, बल्कि कई बार यह राजनीति, धर्म, संस्कृति और उपभोग के अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा भी बन जाता है। हालांकि राजनीतिक बहस अपनी जगह है, वहीं कारोबार और उत्पादन के मोर्चे पर केंद्र सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने वर्ष 2026 में यूपी को देश का नंबर वन मीट उत्पादक राज्य बनाने का टारगेट दिया है। मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश को 2026 के लिए 14.96 लाख मीट्रिक टन मीट उत्पादन का लक्ष्य सौंपा है। वर्तमान में राज्य देश का दूसरा सबसे बड़ा मीट उत्पादक है, जबकि पश्चिम बंगाल पहले स्थान पर है।

2024-25 में पश्चिम बंगाल अव्वल

2024-25 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल ने 13.07 लाख टन मीट उत्पादन के साथ पहला स्थान हासिल किया था। उत्तर प्रदेश 13 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि 2025-26 के लिए पश्चिम बंगाल को 13 लाख टन का लक्ष्य दिया गया है, जो उसके मौजूदा उत्पादन से भी कम है। इसके विपरीत उत्तर प्रदेश को सबसे ऊंचा लक्ष्य सौंपा गया है, जिससे संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार राज्य को उत्पादन के मामले में शीर्ष पर देखना चाहती है।

पांच राज्यों में 58 प्रतिशत उत्पादन

केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश के कुल मीट उत्पादन का 57.55 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ पांच राज्यों से आता है। ये राज्य हैं:

  • पश्चिम बंगाल
  • उत्तर प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • आंध्र प्रदेश
  • तेलंगाना

इनमें पश्चिम बंगाल 13.07 लाख टन और उत्तर प्रदेश 12.80 लाख टन उत्पादन के साथ शीर्ष दो स्थानों पर रहे। मंत्रालय ने 2025-26 के लिए भी इन्हीं राज्यों को सबसे अधिक लक्ष्य दिए हैं।

टारगेट से आगे निकला गुजरात

मीट उत्पादन के मामले में गुजरात ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। वर्ष 2024-25 में राज्य को 34.99 हजार टन उत्पादन का लक्ष्य मिला था, लेकिन उसने 38.32 हजार टन उत्पादन कर लक्ष्य से अधिक हासिल किया। 2025-26 के लिए गुजरात को 37.46 हजार टन का नया लक्ष्य दिया गया है। यह दर्शाता है कि राज्य लगातार अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है।

उत्तराखंड को भी बढ़ा लक्ष्य

उत्तराखंड को भी मंत्रालय ने उत्पादन लक्ष्य में बढ़ोतरी दी है। वर्ष 2024-25 में राज्य को 20.50 हजार टन का लक्ष्य मिला था, जबकि वास्तविक उत्पादन 25.58 हजार टन रहा। अब 2025-26 के लिए उत्तराखंड को 26.70 हजार टन मीट उत्पादन का लक्ष्य सौंपा गया है। इससे स्पष्ट है कि पहाड़ी राज्य भी इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी मजबूत कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते निर्यात अवसर, प्रोसेसिंग सुविधाओं में निवेश और संगठित पशुपालन को बढ़ावा देने की नीतियों के चलते आने वाले वर्षों में मीट उत्पादन में और वृद्धि हो सकती है। हालांकि इस क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक विमर्श भी समानांतर रूप से जारी रहने की संभावना है।

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