नई दिल्ली: देशभर में रबी सीजन की बुवाई तेजी से जारी है और किसानों के लिए गेहूं सबसे महत्वपूर्ण फसल है। गेहूं का उत्पादन बढ़ाने और मजबूत फसल के लिए जहां बीज, सिंचाई और समय पर सुरक्षा उपाय जरूरी हैं, वहीं मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं के पौधों के लिए पोटाश (Potash) एक ऐसा पोषक तत्व है जो फसल की सेहत, पैदावार और गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है।
गेहूं की सेहत के लिए पोटाश क्यों जरूरी?
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि गेहूं के पौधे को कुल 17 आवश्यक पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इनमें से तीन कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन पानी और हवा से मिल जाते हैं, जबकि बाकी 14 तत्व मिट्टी और खादों से मिलते हैं। इन्हीं में से पोटाश (Potassium) एक प्रमुख पोषक तत्व है, जो पौधों को बढ़ने, मजबूत होने और प्रतिकूल मौसम का सामना करने में मदद करता है।
पोटाश की कमी से फसल को होने वाले नुकसान
देश भर में कई इलाकों में किसानों का ध्यान नाइट्रोजन और फास्फोरस पर ज्यादा होता है, लेकिन पोटाश की कमी के लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। इसकी कमी से पौधे कमजोर होकर गिरने लगते हैं। दाने अच्छे से नहीं भरते। कीट और बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। सूखा, पाला या तेज हवा से फसल जल्दी प्रभावित हो जाती है।
आधुनिक उच्च-उपज किस्मों और तेज कृषि तकनीक के कारण मिट्टी से पोटाश तेजी से निकल रहा है, लेकिन उतनी मात्रा में इसकी भरपाई नहीं हो पा रही। यही वजह है कि देश के कई राज्यों में मिट्टी में पोटाश की कमी बढ़ती जा रही है।
पोटाश कैसे बनाता है गेहूं को मजबूत?
1. पौधों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
पोटाश पौधे की कोशिकाओं को मजबूत करता है, जिससे गेहूं कई बीमारियों, फफूंद और कीट हमलों का सामना कर पाता है। इससे फसल का नुकसान कम और उत्पादन बेहतर होता है।
2. प्रतिकूल मौसम से सुरक्षा देता है
पोटाश सूखा, पाला, ओला और तेज हवाओं के दौरान पौधे को सुरक्षित रखता है। यह पौधों को गिरने नहीं देता और उनके तनों को मजबूत बनाए रखता है।
3. जड़ों की वृद्धि में मदद करता है
पोटाश जड़ों को मजबूत और गहरा बनाता है। अच्छी जड़ें मिट्टी से नमी और पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से सोखती हैं, जिससे पौधा स्वस्थ और अधिक दाना भरने वाला बनता है।
4. दानों की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाता है
पोटाश दानों को मोटा, चमकीला और अधिक वजन वाला बनाता है। इससे कुल पैदावार बढ़ती है और किसानों को बाजार में ज्यादा दाम मिलता है।
संतुलित उर्वरक उपयोग क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि खेत में अच्छी पैदावार के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन बेहद जरूरी है। किसानों को चाहिए कि बुवाई से पहले अपने खेत की मिट्टी जांच करवाएं और उसी के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा निर्धारित करें।
पोटाश की सही मात्रा देने से फसल की सेहत बेहतर रहती है। उत्पादन में वृद्धि होती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। गेहूं की अच्छी और सुरक्षित पैदावार के लिए केवल नाइट्रोजन और फास्फोरस ही नहीं, बल्कि पोटाश का संतुलित उपयोग भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मौसम की चुनौतियों, कीटों और मिट्टी की गिरती उर्वरता से निपटने में पोटाश एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं, तो गेहूं की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में निश्चित ही बढ़ोतरी होगी।
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