कृषि समाचार

चीनी उत्पादन बेहतर, एथेनॉल नीति में लचीलापन: किसानों को होगा फायदा

नई दिल्ली: देश के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के लिए राहत की खबर आई है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा है कि इस बार गन्ने की फसल की संभावनाएं काफी उज्ज्वल हैं। 2024-25 सीज़न में चीनी उत्पादन अच्छा रहा है और आगामी फसल पिछली बार से और बेहतर दिखाई दे रही है। इसका सीधा असर किसानों की आमदनी और उद्योग की स्थिरता पर पड़ने वाला है। खाद्य सचिव ने चीनी उद्योग से निर्यात कोटे के मुद्दे पर आपसी सहमति बनाने और फिर सरकार को प्रस्ताव भेजने की अपील की। फिलहाल सरकार निर्यात पर नियंत्रण रखती है और तय कोटे के आधार पर मिलों को आवंटन करती है। उनका कहना है कि “उद्योग पहले आपस में सहमति बनाए और फिर हमारे पास अंतिम प्रस्ताव लेकर आए।”

निर्यात प्रणाली को लेकर उठी आपत्ति

ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) ने मौजूदा कोटा प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि कई मिलें, जिनकी निर्यात में दिलचस्पी नहीं होती या जो दूरस्थ इलाकों में स्थित हैं, वे अपना कोटा दूसरों को बेच देती हैं। इस वजह से काफी मात्रा में चीनी निर्यात नहीं हो पाती। उद्योग की मांग है कि केवल वही मिलें निर्यात कोटा प्राप्त करें जो खुद निर्यात करने की इच्छुक और सक्षम हों।

एथेनॉल मूल्य वृद्धि की मांग

चीनी उद्योग ने एथेनॉल के एक्स-मिल मूल्य बढ़ाने की भी मांग उठाई है। हालांकि खाद्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इस पर निर्णय खाद्य मंत्रालय नहीं बल्कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की समिति लेती है। फिलहाल एथेनॉल की कीमतें नवंबर 2022 से अपरिवर्तित हैं। B-हैवी शीरे से बना एथेनॉल: ₹60.73 प्रति लीटर, गन्ना जूस/सीरप से बना एथेनॉल: ₹65.61 प्रति लीटर है।

एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की डायवर्जन पर अब कोई रोक नहीं

सरकार ने हाल ही में एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्जन पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए हैं। अब मिलें स्वतंत्र रूप से B-हैवी शीरा, गन्ना जूस और सीरप का उपयोग कर सकती हैं। सचिव ने कहा कि “अब कोई रोक नहीं है, जिससे स्थिति और बेहतर होगी। साथ ही टूटा हुआ चावल भी फीडस्टॉक के रूप में उपलब्ध है।”

टूटा चावल भी बनेगा सहारा

सरकार ने अक्टूबर तक के लिए 5.2 मिलियन टन टूटा चावल एथेनॉल के लिए आवंटित किया था, जिसमें से करीब 3 मिलियन टन के उठाव की उम्मीद है। हालांकि शुरुआती चक्रों में देरी के कारण उठाव कम रहा। फिर भी गन्ना और चीनी उद्योग के लिए मौजूदा हालात को सकारात्मक माना जा रहा है। सरकार जहां गन्ने की फसल को लेकर आश्वस्त है, वहीं वह चाहती है कि उद्योग भी निर्यात नीतियों पर आपसी सहमति बनाकर आगे बढ़े। साथ ही एथेनॉल नीति में लचीलापन दिखाकर सरकार ने उद्योग को प्रोत्साहन देने का संकेत भी दिया है। इससे किसानों को समय पर भुगतान, उद्योग को नकदी प्रवाह और देश को ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूती मिलेगी।

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