नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) देश के मछली पालकों और मछुआरा समुदाय के लिए एक बड़ी राहत और अवसर का जरिया बनकर उभरी है। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने 29 जुलाई को लोकसभा में जानकारी दी कि नीली क्रांति लाने के उद्देश्य से इस योजना के तहत अब तक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा चुका है। मंत्रालय का कहना है कि योजना के अंतर्गत मछुआरों और मछली पालन से जुड़े किसानों के लिए कई कल्याणकारी प्रावधान किए गए हैं, जिनमें आर्थिक सहायता, बीमा सुरक्षा, प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाओं का विकास शामिल है।
इस योजना के अंतर्गत 18 से 70 वर्ष की उम्र के मछुआरों को दुर्घटना की स्थिति में बीमा कवरेज दिया जा रहा है, जिसमें मृत्यु या पूर्ण विकलांगता की स्थिति में 5 लाख रुपये, आंशिक विकलांगता पर 2.5 लाख रुपये और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता शामिल है। वहीं, मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान पारंपरिक मछुआरों को तीन महीने तक प्रति व्यक्ति तीन हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिसमें आधी राशि केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाती है।
तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में योजना के तहत देश के तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक लाख फिशिंग वेसल्स पर ट्रांसपोंडर लगाए गए हैं। इसकी लागत 364 करोड़ रुपये बताई गई है। इन ट्रांसपोंडरों के माध्यम से समुद्र में आपात स्थिति के दौरान मछुआरों को दो-तरफा संचार सुविधा मिलती है। इसके साथ ही नावों और जालों के प्रतिस्थापन, डीप सी फिशिंग में सहायता और फिशिंग बोट्स के लिए बीमा सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं।
सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना को भी मत्स्य क्षेत्र से जोड़ा है। 2018-19 से मछुआरों को इस योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई और अब तक लगभग पौने पांच लाख किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इन कार्डों के माध्यम से अब तक 3214 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। इसके अलावा क्रेडिट लिमिट को दो लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया है ताकि मछली पालक किसान अधिक पूंजी तक पहुंच बना सकें।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से फिश हारबर्स, लैंडिंग सेंटर, कोल्ड चेन और मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे जरूरी ढांचों का विकास किया जा रहा है। प्रशिक्षण, कौशल विकास और मत्स्य सहकारी समितियों के सशक्तिकरण के साथ-साथ फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन के गठन में भी सहायता दी जा रही है। योजना का उद्देश्य मछुआरा समुदाय की आजीविका को अधिक स्थायी, लाभकारी और जलवायु अनुकूल बनाना है। इस दिशा में क्लाइमेट रेसीलिएन्ट कोस्टल फिशरमैन विलेजेस और मॉडल फिशिंग विलेजेस की स्थापना की जा रही है। साथ ही सीवीड फार्मिंग, ओरनामेंटल फिशरीस और मेरीकल्चर जैसे विविध क्षेत्रों को प्रोत्साहन देकर मछुआरों की आय के स्रोतों में विविधता लाई जा रही है। इस तरह प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना न केवल मछुआरा समुदाय को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि देश के मत्स्य क्षेत्र को भी संगठित और आत्मनिर्भर दिशा में अग्रसर कर रही है।
