पशुपालन

देश में बढ़ रहा गाय पालन का रुझान, रेड कंधारी नस्ल बनी किसानों की पसंद, जानें इसकी खासियत और मुनाफे का गणित

भारत की लगभग 80 प्रतिशत आबादी आज भी खेती-किसानी से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। लेकिन खेती से होने वाली आमदनी के साथ किसान अब वैकल्पिक आय के स्रोत तलाश रहे हैं, जिनमें पशुपालन प्रमुख बनकर उभरा है। खासकर गाय पालन अब न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में, बल्कि शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में भी एक उभरता हुआ लघु उद्योग बन चुका है। यही नहीं, अब पढ़े-लिखे युवा भी इस परंपरागत पेशे को एक नए नजरिए से देख रहे हैं और इसे आधुनिक तकनीक के साथ अपनाकर अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं।

गाय पालन बना पढ़ेलिखे युवाओं का नया बिजनेस

आज देशभर में हजारों ऐसे युवा मिल जाएंगे जिन्होंने मल्टीनेशनल कंपनियों की नौकरियां छोड़कर गाय पालन की ओर रुख किया है। इन युवाओं ने देखा है कि यदि वैज्ञानिक ढंग से पशुपालन किया जाए और सही नस्लों का चुनाव हो, तो इससे खेती से भी ज्यादा आमदनी की जा सकती है। हालांकि, इसमें सफलता पाने के लिए सिर्फ जोश नहीं, बल्कि ज्ञान और सही मार्गदर्शन भी जरूरी है। कई मामलों में यह देखा गया है कि लोगों को गाय की नस्लों की पर्याप्त जानकारी नहीं होती, जिसकी वजह से दूध उत्पादन कम होता है और अंततः उन्हें नुकसान झेलना पड़ता है।

रेड कंधारी: गाय की देसी नस्ल, जो किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है

ऐसी ही एक नस्ल है ‘रेड कंधारी’, जो भारत की देसी लेकिन अत्यधिक दूध देने वाली गायों में गिनी जाती है। इस नस्ल की खासियतों के बारे में रायबरेली जिले के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत वर्मा (एमवीएससी वेटरिनरी) ने लोकल 18 से खास बातचीत में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि रेड कंधारी नस्ल मुख्य रूप से महाराष्ट्र और कर्नाटक में पाई जाती है और यह दूध उत्पादन में काफी उन्नत मानी जाती है।

क्या है रेड कंधारी गाय की खासियत?

रेड कंधारी गाय की शारीरिक बनावट मजबूत होती है और यह हर तरह के मौसम में आसानी से खुद को ढाल लेती है। इस गाय की लंबाई औसतन 128 सेमी होती है, इसका माथा चौड़ा, कान लंबे और मध्यम आकार के होते हैं, जबकि सींग हल्के घुमावदार होते हैं। रेड कंधारी बैल की लंबाई लगभग 138 सेमी होती है। डॉ. वर्मा के अनुसार, यह गाय प्रति ब्यांत लगभग 600 किलोग्राम तक दूध देती है और एक वर्ष में करीब 275 दिन तक दूध उत्पादन करने की क्षमता रखती है। यह इसे अन्य कई देसी नस्लों से ज्यादा उपयोगी बनाता है।

पालन में सरल, मुनाफे में भारी

रेड कंधारी गाय की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसका पालन करना बेहद आसान है। यह नस्ल कम लागत में अधिक लाभ देने की क्षमता रखती है और देश के किसी भी हिस्से के वातावरण में आसानी से रह सकती है। इस नस्ल की एक गाय की कीमत लगभग 30,000 रुपये तक होती है। यदि सही देखभाल और पौष्टिक चारा दिया जाए, तो यह गाय किसानों के लिए हीरे की खान बन सकती है।

गांव हो या शहर, भविष्य का व्यवसाय है गाय पालन

गाय पालन आज केवल परंपरा नहीं रह गया है, यह एक व्यावसायिक अवसर बन चुका है। सरकार भी कई योजनाओं के तहत पशुपालकों को सब्सिडी और प्रशिक्षण दे रही है। ऐसे में अगर वैज्ञानिक पद्धतियों, सही नस्ल और आधुनिक तकनीक के साथ गाय पालन किया जाए, तो यह कम निवेश में उच्च लाभ देने वाला एक स्थायी व्यवसाय साबित हो सकता है। रेड कंधारी जैसी देसी नस्लें न केवल दूध उत्पादन में बेहतरीन हैं, बल्कि भारत की कृषि-संस्कृति को मजबूती देने का भी काम कर रही हैं। जरूरत सिर्फ जानकारी और सही दिशा में प्रयास की है।

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