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देश को पाम तेल में आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी, केंद्र सरकार ने शुरू किया नेशनल ऑयल पाम मिशन

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में नेशनल ऑयल पाम मिशन (NMEO-OP) की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य देश में पाम तेल का घरेलू उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता को कम करना है। यह मिशन किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, क्योंकि इसके तहत उन्हें पाम की खेती के लिए सरकारी प्रोत्साहन और सहयोग दोनों मिलेगा।

आयात पर खर्च कम करने की कोशिश

भारत हर साल लाखों टन पाम तेल मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों से आयात करता है। इससे सरकार के बजट पर भारी दबाव पड़ता है। खाद्य तेलों पर खर्च किए जाने वाले इस बजट को कम करने के लिए सरकार ने घरेलू स्तर पर तेल उत्पादन बढ़ाने की रणनीति अपनाई है, जिसके अंतर्गत पाम तेल मिशन एक अहम कड़ी है।

क्या है नेशनल ऑयल पाम मिशन?

नेशनल ऑयल पाम मिशन (National Mission on Edible Oils – Oil Palm) केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका मकसद 2029 तक देश में पाम तेल का उत्पादन 3.5 लाख टन से बढ़ाकर 23 लाख टन करना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकार किसानों को पाम की खेती के लिए हरसंभव सहायता देने जा रही है। इसमें बीज, रोपाई, सिंचाई, उर्वरक और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

इस मिशन के जरिए किसानों को अर्थिक प्रोत्साहन दिए जाएंगे ताकि वे पारंपरिक फसलों के साथ-साथ पाम की बागवानी को भी अपनाएं। सरकार ने अगले कुछ वर्षों में पाम की खेती का रकबा 6 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 10 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। इससे किसानों को लंबी अवधि में अच्छी कमाई का अवसर मिलेगा, क्योंकि पाम एक नकदी फसल है जिससे स्थायी आमदनी होती है।

बड़ी कंपनियों का सहयोग

मिशन को गति देने के लिए गोदरेज एग्रोवेट, पतंजलि फूड्स और 3F ऑयल पाम एग्रोटेक जैसी बड़ी कंपनियां भी किसानों के साथ साझेदारी कर रही हैं। ये कंपनियां किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन से लेकर प्रोसेसिंग और मार्केटिंग तक की सुविधाएं मुहैया कराएंगी। इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा और वे तेजी से पाम की खेती की ओर आकर्षित होंगे।

पूर्वोत्तर राज्यों को मिलेगा विशेष लाभ

सरकार ने मिशन के तहत खास फोकस पूर्वोत्तर राज्यों पर किया है। असम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और नागालैंड जैसे राज्यों में पाम की खेती को लेकर अच्छी जलवायु और भूमि उपलब्ध है। यहां के किसानों को सब्सिडी और तकनीकी सहायता देकर पाम की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इन क्षेत्रों में पाम के साथ-साथ सब्जी, दाल और कोकोआ जैसी फसलों को भी उगाया जाएगा, जिससे किसानों को दोहरी आमदनी होगी।

देश में खाद्य तेल आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस पहल

पिछले कुछ वर्षों में घरेलू खाद्य तेल की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन उत्पादन के मुकाबले यह मांग कहीं अधिक है। ऐसे में पाम ऑयल मिशन सरकार की एक रणनीतिक योजना है, जो न केवल देश की खाद्य तेल जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाएगी। नेशनल ऑयल पाम मिशन केंद्र सरकार की एक दूरदर्शी पहल है, जो कृषि और औद्योगिक दोनों स्तरों पर असर डालेगी। इससे न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश के किसानों को स्थायी और लाभकारी खेती का विकल्प भी मिलेगा। अगर यह मिशन जमीनी स्तर पर सफल होता है, तो भारत आने वाले वर्षों में खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकता है और लाखों किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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