कृषि समाचार

सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन पर रिपोर्ट मांगी

Supreme Court on farmers protest

नई दिल्ली: किसानों के आंदोलन से जुड़े अहम मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उच्चस्तरीय समिति से अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें पेश करने को कहा है। यह समिति वर्ष 2024 में पंजाब और हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर चले किसान आंदोलन से जुड़े विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए गठित की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात को देखते हुए यह मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और इसे औपचारिक रूप से समाप्त किया जा सकता है।

पीठ ने मांगी संक्षिप्त सिफारिशें

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि शंभू बॉर्डर पर हाईवे की नाकेबंदी का मुद्दा अब खत्म हो चुका है और वहां यातायात सामान्य रूप से बहाल है। ऐसे में अदालत ने समिति से संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट सिफारिशें पेश करने को कहा, ताकि उन्हें संबंधित प्राधिकरणों तक भेजा जा सके। पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि समिति अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपेगी और अगले आदेश तक उसकी सामग्री सार्वजनिक नहीं की जाएगी। अदालत ने उम्मीद जताई कि रिपोर्ट में किसानों की शिकायतों और संभावित समाधान को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।

शंभू बॉर्डर पर चला था लंबा आंदोलन

फरवरी 2024 से पंजाब और हरियाणा की सीमा पर स्थित शंभू बॉर्डर किसान आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना रहा। प्रदर्शनकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी सहित कई मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। आंदोलन के चलते अंबाला से नई दिल्ली जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित हुआ और यातायात बाधित रहा।

हरियाणा सरकार ने दी थी चुनौती

मामले की पृष्ठभूमि में हरियाणा सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें शंभू बॉर्डर से बैरिकेड हटाने के निर्देश दिए गए थे। सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बैरिकेड लगाए थे, क्योंकि संयुक्त किसान मोर्चा (नॉन-पॉलिटिकल) और किसान मजदूर मोर्चा ने दिल्ली कूच का आह्वान किया था।

सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को राजनीतिक रंग देने से बचने की सलाह देते हुए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश नवाब सिंह कर रहे हैं। अदालत ने तब कहा था कि किसानों की समस्याओं पर चरणबद्ध तरीके से विचार कर संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए। अब समिति की रिपोर्ट और सिफारिशों पर सभी पक्षों की नजर टिकी है, क्योंकि इसके आधार पर इस लंबे विवाद के औपचारिक समापन की दिशा तय हो सकती है।

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