नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026: देश में गन्ने की खेती तेजी से आधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ रही है। पारंपरिक खेती की जगह अब वैज्ञानिक और यंत्रीकृत तरीके अपनाए जा रहे हैं, जिससे किसानों की लागत घट रही है और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और उससे जुड़े संस्थानों द्वारा विकसित नई तकनीकों का उद्देश्य बीज की बचत, रोग नियंत्रण, श्रम लागत में कमी और अधिक उपज सुनिश्चित करना है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इन तकनीकों को अपनाकर गन्ने की खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और आधुनिक बनाया जा सकता है।
आधुनिक तकनीकों से बदल रही गन्ना खेती
गन्ने की फसल में लाल सड़न और स्मट जैसी बीमारियां लंबे समय से किसानों के लिए बड़ी चुनौती रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने यांत्रिक उपचार प्रणाली विकसित की है। इस तकनीक के माध्यम से गन्ने की कलियों और बीज सामग्री का उपचार लाभकारी सूक्ष्मजीवों तथा आवश्यक रसायनों से किया जाता है, जिससे शुरुआती अवस्था में रोगों का खतरा काफी कम हो जाता है। इसके साथ ही बीज सामग्री की आवश्यकता भी घटती है और स्वस्थ पौध तैयार होती है।
रोगमुक्त पौध तैयार करने में टिश्यू कल्चर की बढ़ी भूमिका
गन्ना उत्पादन में टिश्यू कल्चर तकनीक किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है। इस विधि से तैयार पौधे पूरी तरह रोगमुक्त और समान गुणवत्ता वाले होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक एकड़ टिश्यू कल्चर नर्सरी से लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में रोपाई की जा सकती है। इससे पौधों की एकरूपता बनी रहती है और कई क्षेत्रों में प्रति एकड़ 60 से 70 टन तक उत्पादन प्राप्त हो रहा है।
सिंगल बड तकनीक से घटेगी बीज की लागत
पारंपरिक गन्ना रोपाई में बड़ी मात्रा में बीज गन्ने की आवश्यकता होती है, जिससे किसानों का खर्च बढ़ जाता है। सिंगल बड तकनीक इस समस्या का प्रभावी समाधान मानी जा रही है। इसमें पूरे गन्ने के बजाय केवल एक कली का उपयोग किया जाता है। पहले इन कलियों को नर्सरी में तैयार किया जाता है और बाद में खेतों में लगाया जाता है। इससे बीज की लागत कम होती है, पौधों के जीवित रहने की संभावना बढ़ती है और किसानों को अधिक आर्थिक लाभ मिलता है।
यंत्रीकरण से कम होगी मजदूरी और बढ़ेगी दक्षता
खेती में श्रमिकों की कमी और बढ़ती मजदूरी को देखते हुए आधुनिक गन्ना रोपण मशीनों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ये मशीनें एक साथ खाई बनाना, बीज रखना, खाद डालना और मिट्टी से ढंकने जैसे कई कार्य करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इनके उपयोग से मजदूरी की आवश्यकता लगभग 90 प्रतिशत तक घट सकती है, जबकि रोपाई की लागत में करीब 60 प्रतिशत तक बचत संभव है।
फसल अवशेष प्रबंधन से मिलेगा अतिरिक्त लाभ
कटाई के बाद खेतों में बचा गन्ने का अवशेष किसानों के लिए बड़ी समस्या बनता है। नई यांत्रिक तकनीकों की सहायता से इन अवशेषों का प्रभावी प्रबंधन किया जा रहा है। इससे खेत जल्दी तैयार हो जाते हैं और अगली रैटून फसल समय पर शुरू की जा सकती है। इससे खेती की लागत घटने के साथ उत्पादन चक्र भी तेज होता है।
चौड़ी कतार और खाई विधि से बढ़ेगी उत्पादकता
विशेषज्ञ किसानों को चौड़ी कतार और खाई विधि से गन्ना लगाने की सलाह दे रहे हैं। इस पद्धति में पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखी जाती है, जिससे उन्हें अधिक धूप, पोषण और हवा मिलती है। इसके साथ ही बीज की आवश्यकता लगभग आधी रह जाती है। चौड़ी कतारों के कारण ट्रैक्टर से निराई-गुड़ाई और अन्य कृषि कार्य भी आसानी से किए जा सकते हैं। साथ ही पानी का बेहतर उपयोग संभव होता है, जो जल संकट की स्थिति में बेहद उपयोगी है।
डिजिटल तकनीक से होगी स्मार्ट गन्ना खेती
गन्ना उत्पादन में अब डिजिटल तकनीकों का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। खेतों की निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उपग्रह आधारित प्रणालियों का सहारा लिया जा रहा है। इनके माध्यम से फसल की वृद्धि, पकने की स्थिति और संभावित उत्पादन का आकलन किया जा सकता है। इससे चीनी मिलों को कटाई की बेहतर योजना बनाने में सुविधा मिलती है और किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह भी उपलब्ध हो सकती है।
आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी किसानों की आय
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीकों के उपयोग से गन्ना उत्पादन बढ़ाने, रोगों पर नियंत्रण करने, संसाधनों की बचत करने और खेती की लागत कम करने में महत्वपूर्ण सफलता मिल रही है। यही कारण है कि देश के अनेक गन्ना उत्पादक राज्यों में किसान अब आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं। आने वाले समय में वैज्ञानिक और तकनीक आधारित खेती गन्ना उत्पादकों की आय बढ़ाने के साथ देश की गन्ना खेती को अधिक प्रतिस्पर्धी और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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