कृषि समाचार

झारखंड में कृषि अनुसंधान की नई सुविधाओं का उद्घाटन

New agricultural research facilities inaugurated in Jharkhand

रांची: झारखंड के किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रांची के गढ़खटंगा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने किसानों तक कृषि वैज्ञानिकों के शोध, उन्नत बीजों और नई तकनीकों को पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने संस्थान में नए अतिथिगृह के निर्माण की आधारशिला भी रखी। इन सुविधाओं से कृषि अनुसंधान, शिक्षा और नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

रांची में शुरू हुईं कृषि अनुसंधान और शिक्षा से जुड़ी नई सुविधाएं

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संस्थान में प्रशासनिक एवं विद्यालय भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा खेल परिसर और नई पीढ़ी की प्रजनन तकनीक से जुड़ी सुविधा का उद्घाटन किया। इन सुविधाओं से संस्थान में शैक्षणिक गतिविधियों, कृषि अनुसंधान, खेल और उन्नत बीज विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही नए अतिथिगृह के निर्माण की आधारशिला रखी गई। इस परियोजना पर 119 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई। इन पहलों का उद्देश्य संस्थान की क्षमता बढ़ाना और कृषि क्षेत्र में नए अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है।

किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सलाह

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को खेती में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना चाहिए। अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का चयन, मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद का इस्तेमाल और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने से फसल उत्पादन में सुधार हो सकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड की मिट्टी, जलवायु और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर कृषि तकनीक विकसित की जानी चाहिए। अलग-अलग क्षेत्रों की जमीन और मौसम में अंतर होता है, इसलिए किसानों को ऐसी पद्धतियां अपनानी चाहिए जो उनके खेतों के अनुकूल हों। उन्होंने बेहतर बीजों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने और कृषि संस्थानों में हुए शोध का लाभ किसानों तक पहुंचाने की जरूरत भी बताई।

पारंपरिक खेती और आधुनिक तकनीक के तालमेल पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड की प्राकृतिक संपदा और पारंपरिक कृषि ज्ञान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय अनुभव और पुरानी कृषि परंपराओं का अपना महत्व है, लेकिन खेती के सामने आने वाली नई चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक तकनीक का सहारा लेना भी जरूरी है। उन्होंने भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान को कृषि अनुसंधान, नए प्रयोगों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण संस्थान बताया। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों के बीच जाकर नई तकनीकों की जानकारी साझा करने और उन्हें खेतों में इन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की।

फसल उत्पादन के साथ पशुपालन अपनाने की सलाह

केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को केवल एक फसल या कृषि गतिविधि पर निर्भर रहने के बजाय खेती के विविध विकल्प अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसान अनाज और सब्जियों की खेती के साथ पशुपालन जैसी गतिविधियों को भी जोड़ सकते हैं। एकीकृत खेती से किसानों को आमदनी के कई स्रोत मिल सकते हैं और किसी एक फसल की पैदावार घटने या बाजार में कीमत कम होने पर होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने खाद के संतुलित उपयोग पर भी जोर दिया। मिट्टी और फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्व उपलब्ध कराने से मिट्टी की सेहत बनाए रखने और बेहतर उत्पादन हासिल करने में सहायता मिल सकती है।

सरकारी योजनाओं का लाभ गांव-गांव तक पहुंचाने की जरूरत

शिवराज सिंह चौहान ने किसान कल्याण से जुड़ी सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ जरूरतमंद किसानों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और अनुसंधान संस्थानों को किसानों के साथ सीधा संपर्क बनाए रखना होगा। किसानों को समय पर सही जानकारी, गुणवत्तापूर्ण बीज और खेती से जुड़ी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। कृषि अनुसंधान संस्थानों और किसानों के बीच बेहतर तालमेल से खेतों की वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान विकसित करने में मदद मिल सकती है।

किसान गोष्ठी में 1,500 किसानों ने लिया हिस्सा

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान की ओर से अनुसूचित जाति उपयोजना और जनजातीय उपयोजना के तहत रबी सत्र से पहले किसान गोष्ठी तथा कृषि सामग्री वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ जिलों के करीब 1,500 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती के तरीकों की जानकारी देना था। इस आयोजन में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और नीति निर्माण से जुड़े अधिकारियों को एक मंच पर लाया गया, जिससे खेती की समस्याओं पर सीधे चर्चा की जा सके।

रबी सत्र की तैयारी के समय आयोजित ऐसी गोष्ठियों से किसानों को फसल चयन, बीजों के चुनाव, खाद के उचित इस्तेमाल और बेहतर कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी मिल सकती है। साथ ही, वैज्ञानिकों को किसानों की जरूरतों और खेतों में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को समझने का अवसर मिलता है।

कृषि अनुसंधान का लाभ किसानों के खेतों तक पहुंचाना जरूरी

झारखंड में खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित पोषण, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाना आवश्यक है। रांची स्थित भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में नई सुविधाओं की शुरुआत और किसान गोष्ठी का आयोजन इसी दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं। हालांकि, इन पहलों का वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा, जब संस्थान में विकसित तकनीक और अनुसंधान से मिली जानकारी किसानों तक पहुंचेगी और वे उसे अपनी जरूरतों के अनुसार अपनाएंगे। वैज्ञानिकों, कृषि विभाग और किसानों के बीच बेहतर तालमेल से झारखंड में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आमदनी के नए अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है।

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