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नैनो उर्वरक की जबरन बिक्री पर सरकार ने लगाई रोक

Nano-fertilizer

नई दिल्ली: किसानों को राहत देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एक अहम अधिसूचना जारी की है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि नैनो उर्वरक की जबरन बिक्री नहीं की जा सकती। अब नैनो उर्वरक को किसी अन्य खाद या कृषि उत्पाद के साथ जोड़कर किसानों को बेचने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह निर्णय ऐसे समय पर लिया गया है जब विभिन्न क्षेत्रों से शिकायतें मिल रही थीं कि सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ अन्य उत्पाद जबरन बेचे जा रहे हैं। इससे किसानों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। पहले से ही खाद की कमी, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और कम वर्षा की आशंका के कारण किसान दबाव में हैं।

नैनो यूरिया क्या है और क्यों उठे सवाल

नैनो यूरिया; यूरिया खाद का तरल रूप होता है, जो पौधों को नाइट्रोजन प्रदान करता है। नाइट्रोजन पौधों में अमीनो अम्ल, रंगद्रव्य और एंजाइम जैसे जरूरी तत्वों के निर्माण में सहायक होता है। हालांकि, इसके प्रभाव को लेकर कई सवाल भी उठते रहे हैं। विशेष रूप से इस दावे पर संदेह जताया गया है कि पांच सौ मिलीलीटर नैनो यूरिया, पैंतालीस किलो नीम लेपित दानेदार यूरिया के बराबर होता है।

कंपनियों के लिए तय किए गए नए नियम

सरकार ने नैनो उर्वरक बनाने और बेचने वाली कंपनियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कंपनियों को अपने उत्पाद से जुड़ी पूरी और स्पष्ट जानकारी किसानों तक पहुंचानी होगी।

अब यह अनिवार्य किया गया है कि नैनो उर्वरक की बोतल या उसके साथ दिए गए पर्चे में निम्नलिखित जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी जाए:

  • अलग-अलग फसलों के लिए सही मात्रा
  • फसल की किस अवस्था में इसका उपयोग करना है
  • उपयोग करने की सही विधि

इसके अलावा, कृषि विज्ञान केंद्रों में किसानों को नैनो उर्वरक के उपयोग और उसके लाभ के बारे में जानकारी देने तथा प्रदर्शन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

पहले भी सरकार दिखा चुकी है सख्ती

इससे पहले भी सरकार ने अवैध बिक्री पर सख्ती दिखाई थी। वर्ष दो हजार बीस में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ अन्य उत्पाद जोड़कर बेचना गैरकानूनी है। इससे उर्वरकों की लागत बढ़ती है और किसानों की परेशानियां बढ़ती हैं।

व्यापारियों और वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया

हाल ही में हरियाणा के करनाल जिले में खाद, बीज और कीटनाशक व्यापारियों ने एक दिन की हड़ताल की थी। उनका आरोप था कि कंपनियां उन पर दबाव डालती हैं कि वे सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ नैनो उत्पाद भी बेचें। वहीं, कृषि वैज्ञानिकों ने भी इस पर चिंता जताई है और इस तरह की अवैध प्रथाओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि किसानों को सही और पारदर्शी जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे अपनी जरूरत के अनुसार ही उत्पाद खरीद सकें। सरकार का यह कदम किसानों को अनावश्यक खर्च से बचाने और उर्वरक बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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