नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026: देश लगातार 27 वर्षों से दूध उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान बनाए हुए है। भारत ने बीते वर्ष लगभग 25 करोड़ टन दूध का उत्पादन कर अपनी मजबूत डेयरी व्यवस्था का परिचय दिया है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती मांग के मुकाबले दूध उत्पादन की रफ्तार पर्याप्त नहीं है। ऐसे में डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता बताई जा रही है।
भारत बना हुआ है दूध उत्पादन में अग्रणी
देश में दूध देने वाले गाय और भैंसों की संख्या 30 करोड़ से अधिक बताई जाती है। इनमें से लगभग 10 करोड़ पशु ही नियमित रूप से दूध उत्पादन कर रहे हैं। इसके बावजूद भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना हुआ है। दूध उत्पादन में भैंसों का योगदान सबसे अधिक है, जबकि गाय दूसरे स्थान पर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग के बावजूद प्रति पशु दूध उत्पादन के मामले में भारत अभी भी कई देशों से पीछे है। यही कारण है कि वैश्विक डेयरी व्यापार और निर्यात में भारत अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है।
प्रति पशु उत्पादन बढ़ाने पर होगा सबसे अधिक लाभ
डेयरी क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि अब केवल पशुओं की संख्या बढ़ाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। इसके लिए बेहतर नस्ल, संतुलित पोषण, वैज्ञानिक प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों का अधिक उपयोग आवश्यक माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने डेयरी क्षेत्र में व्यापक सुधार के लिए छह प्रमुख बिंदुओं पर कार्य करने की सलाह दी है। इनमें आधुनिक प्रसंस्करण संयंत्रों की संख्या बढ़ाना, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार का विस्तार करना, घी जैसे उत्पादों के निर्यात पर विशेष ध्यान देना, सहकारी व्यवस्था को मजबूत करना, डेयरी मूल्य श्रृंखला और आधारभूत संरचना विकसित करना तथा पशुओं के चारे की लागत कम करना शामिल है।
पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए जरूरी सुधार
विशेषज्ञों के अनुसार अधिक से अधिक किसानों को पशुपालन से जोड़ना समय की आवश्यकता है। वहीं जो किसान पहले से इस व्यवसाय में हैं, उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए भी ठोस कदम उठाने होंगे। चार से पांच पशु पालने वाले छोटे पशुपालकों की आमदनी का बड़ा हिस्सा चारे, बिजली और डीजल जैसी बढ़ती लागत में खर्च हो जाता है। इसी कारण नई पीढ़ी पशुपालन को भविष्य के व्यवसाय के रूप में अपनाने से हिचक रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पशुपालन को अधिक संगठित नहीं बनाया जाएगा, तब तक उत्पादन लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना कठिन रहेगा।
बेहतर पैकिंग से बढ़ सकती है डेयरी उत्पादों की कीमत
दूध को छोड़कर अधिकांश डेयरी उत्पाद प्रसंस्करण के बाद बाजार में पहुंचते हैं। ऐसे उत्पादों की गुणवत्ता के साथ उनकी पैकिंग भी बाजार मूल्य और उपभोक्ताओं की पसंद पर सीधा प्रभाव डालती है। विशेष रूप से घी, पनीर, मक्खन और आइसक्रीम जैसे उत्पादों में आकर्षक एवं गुणवत्तापूर्ण पैकिंग से बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन क्षमता बढ़ाने, लागत घटाने, प्रसंस्करण सुविधाओं का विस्तार करने और मूल्य संवर्धन पर एक साथ काम किया जाए, तो भारत न केवल दूध उत्पादन में बल्कि डेयरी उत्पादों के वैश्विक निर्यात में भी नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
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