मुजफ्फरपुर: बिहार में मक्का की खेती बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन सरकारी खरीद व्यवस्था के अभाव में यह फसल आज भी किसानों के लिए संकट बनी हुई है। मंडी व्यवस्था नहीं होने के कारण बिहार में मक्का खरीद की जिम्मेदारी पैक्स यानी प्राथमिक कृषि साख समितियों पर है। लेकिन, जमीनी सच्चाई यह है कि पैक्स में धान और गेहूं की खरीद तो होती है, मक्का अब भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी से बाहर है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है, जिन्हें अपनी उपज मजबूरी में निजी व्यापारियों को कम दाम पर बेचना पड़ रहा है।
बिहार का बड़ा मक्का बेल्ट, फिर भी खरीद व्यवस्था नहीं
मुजफ्फरपुर से लेकर कोसी और सीमांचल तक राज्य का प्रमुख मक्का उत्पादक क्षेत्र फैला है। हजारों किसान पूरी तरह मक्का की खेती पर निर्भर हैं। लेकिन इथेनॉल प्लांट से जुड़ी नीतियों में बदलाव के बाद मक्का की खरीद में भारी गिरावट आई है। फैक्ट्रियां पहले की तुलना में कम मक्का ले रही हैं और इस स्थिति का फायदा निजी व्यापारी उठा रहे हैं, जो किसानों से कम कीमत पर खरीद कर रहे हैं।
MSP तय, फिर भी सरकारी खरीद नहीं
मुजफ्फरपुर के बड़े मक्का किसान और कारोबारी सतीश द्विवेदी सवाल उठाते हैं कि जब सरकार ने मक्के का MSP तय कर रखा है, तो पैक्स के जरिए इसकी खरीद क्यों नहीं हो रही। उनका कहना है कि धान और गेहूं की तरह मक्का की भी खरीद संभव है, लेकिन प्रखंड से जिला स्तर तक शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार, पैक्स पर सरकार का दबाव नहीं होने के कारण खरीद शुरू नहीं हो पा रही है, जबकि इच्छाशक्ति हो तो व्यवस्था तुरंत लागू की जा सकती है।
पैक्स अध्यक्षों की राय: नियम नहीं, सिस्टम की कमी
कई पैक्स पदाधिकारियों का कहना है कि मक्का खरीद पर किसी तरह की नियम संबंधी रोक नहीं है। बंदरा प्रखंड के मुन्नी बैंगरी पैक्स के अध्यक्ष मनोज ठाकुर के मुताबिक, सरकार पहले मक्का खरीद की बात कर चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। उनका कहना है कि MSP निर्धारित होने के बावजूद खरीद न होना किसानों और पैक्स दोनों के लिए नुकसानदेह है।
घाटे में चल रहे पैक्स, मक्का खरीद से मिल सकता है सहारा
हत्था पैक्स के अध्यक्ष नंद किशोर द्विवेदी बताते हैं कि मक्का की खरीद नहीं होने से पैक्स भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मुजफ्फरपुर में केवल 6 चावल मिलें हैं, जबकि पैक्स की संख्या 385 है। ऐसे में सिर्फ धान और गेहूं के भरोसे पैक्स का संचालन मुश्किल हो गया है। उनका मानना है कि अगर पैक्स में मक्का की खरीद शुरू हो जाए, तो पैक्स को भी आर्थिक सहारा मिलेगा और किसानों को भी उचित कीमत मिल सकेगी।
2020 का आश्वासन, अब तक अधूरा
सरकार ने वर्ष 2020 में पैक्स के जरिए मक्का खरीद का आश्वासन दिया था। उस समय कोसी और सीमांचल क्षेत्रों में मक्का खरीद की घोषणा भी की गई थी, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी यह योजना जमीन पर नहीं उतर सकी। गायघाट प्रखंड के मोहम्मदपुर सूरा पैक्स के अध्यक्ष सुनील कुमार राय का कहना है कि प्रखंड और जिला स्तर पर कई बार मांग रखी गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। धान के लिए एसएफसी और चावल मिलों से जुड़ा सिस्टम मौजूद है, जबकि मक्का के लिए पूरे बिहार में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं बनाई गई है।
किसानों की मांग: पैक्स में खरीद शुरू हो
किसानों का कहना है कि अगर पैक्स के जरिए मक्का खरीद शुरू की जाए तो उन्हें MSP का लाभ मिलेगा, बिचौलियों की भूमिका कम होगी और पैक्स भी घाटे से बाहर आ सकेंगे। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जब नियमों में कोई बाधा नहीं है, तो फिर पैक्स में मक्का की खरीद आखिर क्यों नहीं शुरू हो पा रही है।
ये भी पढ़ें: बिहार में निजी नर्सरी लगाने पर 50% सब्सिडी, जानिए कैसे उठाएँ लाभ
