कृषि समाचार

मक्का किसानों का संकट और न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी पर सवाल

maize farmers crisis and MSP increase 2026

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा खरीफ 2026-27 के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के बाद मक्का किसानों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। सरकार जहां एक ओर किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता बनाने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की बात करती रही, वहीं दूसरी ओर मक्का उत्पादन बढ़ाने के बाद किसानों को बाजार और नीतियों के दबाव में नुकसान झेलना पड़ रहा है।

उत्पादन बढ़ा, लेकिन दाम नहीं मिले

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में मक्का उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। किसानों ने सरकार की अपील पर भरोसा करते हुए बड़े पैमाने पर मक्का की खेती की और उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। लेकिन जब फसल बाजार में आई तो कीमतें गिर गईं और किसान कम दाम पर बेचने को मजबूर हो गए।

एमएसपी बढ़ोतरी पर उठे सवाल

कृषि मंत्रालय के अनुसार मक्का उत्पादन की लागत में वृद्धि हुई है, लेकिन इसके मुकाबले न्यूनतम समर्थन मूल्य में बहुत मामूली बढ़ोतरी की गई है। इससे किसानों को उनकी लागत के अनुरूप लाभ नहीं मिल पा रहा है। बढ़ती लागत और सीमित समर्थन मूल्य के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा है।

इथेनॉल और उद्योग का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि मक्का की मांग इथेनॉल उत्पादन और पशु आहार उद्योग से जुड़ी हुई है। हालांकि, नीतिगत बदलावों के कारण इन क्षेत्रों में मक्का की खपत प्रभावित हुई है। इससे बाजार में मांग कमजोर पड़ी और किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाया।

आयात से बढ़ी चिंता

देश में उत्पादन पर्याप्त होने के बावजूद मक्का का आयात भी एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। इससे घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ा और किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। किसान संगठनों का कहना है कि इस तरह के फैसले स्थानीय उत्पादकों के हितों के खिलाफ हैं।

लागत बढ़ी, मुनाफा घटा

डीजल, बीज, खाद और अन्य कृषि इनपुट की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में लागत बढ़ने के बावजूद न्यूनतम समर्थन मूल्य में मामूली बढ़ोतरी किसानों के लिए चिंता का विषय है। इससे खेती की लाभप्रदता प्रभावित हो रही है।

भविष्य को लेकर अनिश्चितता

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो किसान मक्का की खेती से दूरी बना सकते हैं। इससे देश के फसल विविधीकरण और उत्पादन लक्ष्यों पर भी असर पड़ सकता है। किसानों का मानना है कि उन्हें स्थिर और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए नीतियों में संतुलन जरूरी है।

ये भी पढ़ें: नवजात पशु शिशुओं की देखभाल से घटेगी मृत्यु दर, बढ़ेगा मुनाफा

Related posts

Leave a Comment