नई दिल्ली: बारिश के इस मौसम में फलों के पौधे लगाने का काम जोरों पर होता है। खासकर आम का बाग लगाने के लिए यह समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। आम एक दीर्घकालिक फसल है जो एक बार ठीक से लगाने पर वर्षों तक फल देती है, लेकिन शुरुआती चरणों में की गई छोटी सी गलती भी आगे चलकर भारी नुकसान पहुंचा सकती है। डॉ. एस. के. सिंह, वरिष्ठ फल रोग विशेषज्ञ और डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर में अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना के पूर्व प्रधान अन्वेषक, बताते हैं कि आम की बागवानी वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो यह किसानों के लिए एक स्थायी आमदनी का जरिया बन सकती है। उन्होंने नए आम के बाग लगाने के इच्छुक किसानों के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं।
साइट चयन: बाग की नींव मजबूत हो तभी फल मीठे होंगे
आम का बाग लगाने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह जगह सड़क और बाज़ार के पास हो, ताकि फलों की बिक्री और कृषि सामग्री की खरीद आसान हो सके। खेत समतल हो, जल निकासी उत्तम हो और सिंचाई की पुख्ता व्यवस्था भी होनी चाहिए। आम के पौधों के लिए मध्यम से हल्की, गहरी और अच्छी जलधारण क्षमता वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत से पहले ही खरपतवार, पत्थर और अवशेष हटा लें और ज़रूरत पड़ने पर थोड़ी ढाल दें, ताकि बारिश का पानी जमा न हो।
पौधों के बीच सही दूरी: लंबी उम्र और अच्छी पैदावार की गारंटी
पौधों के बीच दूरी का चयन उनकी किस्म के आधार पर करें। लंबी किस्मों जैसे मालदा, लंगड़ा, चौसा और फजली के लिए 12×12 मीटर की दूरी आदर्श है। वहीं बौनी किस्मों जैसे दशहरी, नीलम और तोतापुरी को 10×10 मीटर की दूरी पर लगाया जा सकता है। उन्नत बागवानी पद्धतियों में डबल रो हेज सिस्टम या अति सघन बाग विधि को अपनाया जा रहा है। इसमें बौनी किस्मों को (5×5)×10 मीटर की दूरी पर लगाया जाता है, जिससे प्रति हेक्टेयर लगभग 220 पौधे लगाए जा सकते हैं। आम्रपाली जैसी अति बौनी किस्मों को 2.5×2.5 मीटर की दूरी पर लगाकर प्रति हेक्टेयर करीब 1600 पौधे लगाए जा सकते हैं। इससे न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि पौधे भी लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं।
गड्ढे की तैयारी और खाद का महत्व: पौधों की सेहत का आधार
पौधों की रोपाई से पहले 1×1×1 मीटर के गड्ढे खुदवाएं। गड्ढा खोदते समय ऊपरी और निचली मिट्टी को अलग रखें। फिर हर गड्ढे में 50 किलो अच्छी सड़ी गोबर की खाद, 100 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और 100 ग्राम म्यूरिएट ऑफ पोटाश मिलाएं। गड्ढे को 2 से 3 हफ्तों तक धूप में खुला छोड़ दें, ताकि उसमें मौजूद कीट और रोगाणु नष्ट हो जाएं। इसके बाद पहले खाद मिश्रित मिट्टी और फिर ऊपर की साफ मिट्टी से गड्ढे को भरें।
रोपाई का समय और तरीका: मॉनसून का करें पूरा फायदा
उत्तर और पूर्वी भारत में आम का रोपण मानसून के समय यानी जून से सितंबर के बीच करना सबसे उत्तम माना जाता है। इस समय मिट्टी में नमी पर्याप्त होती है जिससे पौधों की जड़ें तेजी से जमती हैं। हमेशा प्रमाणित नर्सरी से ही रोगमुक्त, ग्राफ्टेड और स्वस्थ पौधे खरीदें। रोपण के तुरंत बाद सिंचाई करना अनिवार्य है। पहले दो-तीन महीनों तक पौधों के आसपास की मिट्टी में नमी बनाए रखें।
बाग की देखभाल: नमी, मल्चिंग और खरपतवार नियंत्रण जरूरी
पौधों के चारों ओर सूखी पत्तियों या प्लास्टिक शीट से मल्चिंग करें। इससे नमी बनी रहती है और खरपतवार भी नहीं उगते। पौधों को सीधा रखने के लिए उन्हें सहारा दें और नियमित रूप से खरपतवार हटाते रहें। ध्यान रखें कि शुरुआती 2–3 साल पौधों की देखभाल सबसे अधिक जरूरी होती है। आम का बाग एक दीर्घकालिक निवेश है। यदि इसे वैज्ञानिक पद्धति से लगाया जाए, तो यह किसानों के लिए वर्षों तक स्थायी आमदनी का साधन बन सकता है। इस मानसून सीजन को अवसर में बदलें — मिट्टी, पौधा, दूरी और देखभाल का ध्यान रखें और देश के इस सबसे लोकप्रिय फल से भरपूर लाभ कमाएं।
