मेरठ: संयुक्त किसान मोर्चा, उत्तर प्रदेश की मेरठ इकाई ने मंगलवार को जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के जरिए उन्होंने प्रदेश में बिजली के निजीकरण, दरों में प्रस्तावित वृद्धि और बिजली व्यवस्था से जुड़ी अन्य समस्याओं को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। किसानों का कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी सेवा का निजीकरण आम जनता और किसानों के हितों के खिलाफ है। इससे न सिर्फ बिजली महंगी होगी बल्कि इसकी उपलब्धता भी सीमित हो जाएगी। मोर्चा ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार बिजली कंपनियों के घाटे का जो तर्क दे रही है वह पूरी तरह भ्रामक है। बिजली विभाग का घाटा बढ़ा-चढ़ाकर 19,600 करोड़ रुपये दिखाया जा रहा है जबकि सच्चाई यह है कि सरकारी विभागों और बड़े उपभोक्ताओं पर 72,000 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि है जिसे वसूलना चाहिए। इससे पहले आम लोगों पर बोझ डालना अन्यायपूर्ण है।
किसानों ने मांग की है कि दक्षिणांचल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का फैसला वापस लिया जाए। स्मार्ट मीटर लगाने, बिजली दरों को ईंधन कीमतों से जोड़ने और अलग-अलग समय के अनुसार अलग-अलग दरें तय करने की योजना रद्द की जाए। प्रस्तावित 45 प्रतिशत दर वृद्धि को भी वापस लेने की मांग की गई है। किसानों ने यह भी कहा कि उनके लिए नलकूपों को कम से कम 18 घंटे बिजली आपूर्ति मिलनी चाहिए जबकि ग्रामीण क्षेत्र के घरेलू उपभोक्ताओं को 20 घंटे और शहरी क्षेत्र को 24 घंटे बिजली दी जाए। साथ ही अप्रैल 2023 से नलकूपों के बकाया बिल माफ करने और 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने के सरकार के वायदे को तत्काल लागू करने की मांग की गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि बिजली उपभोक्ताओं से अवैध रूप से वसूले गए टैक्स का 31,725 करोड़ रुपये बिजली विभाग के पास जमा है, जिसे उपभोक्ताओं के बिलों में समायोजित किया जाए। कनेक्शन काटने और जोड़ने पर लगने वाला शुल्क खत्म करने, विभाग में खाली पदों पर भर्ती करने और सभी संविदाकर्मियों को नियमित करने की भी मांग की गई है। किसानों ने कहा कि जगह-जगह जर्जर हो चुके तार, खंभे और ट्रांसफार्मर बदलना जरूरी है ताकि जानलेवा दुर्घटनाओं को रोका जा सके। इसके अलावा गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल तय करने, किसानों के बकाये का शीघ्र भुगतान करने और बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की भी मांग रखी गई। सहकारिता विभाग द्वारा किसानों के कर्ज पर बढ़ाए गए ब्याज को भी तत्काल वापस लेने की बात कही गई है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र फैसला नहीं लिया तो राज्यव्यापी आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस मौके पर प्रवक्ता मनीष भारती समेत कई किसान नेता मौजूद रहे जिन्होंने बिजली निजीकरण के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
