नई दिल्ली: पशुपालन हमेशा से ही किसानों और पशुपालकों के लिए आय का प्रमुख स्रोत रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यह एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में उभरा है। कई लोगों ने अच्छी-खासी नौकरियां छोड़कर पशुपालन को अपनाया और इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। हालांकि, पशुपालन से अधिक लाभ तभी संभव है जब आपके पशु स्वस्थ रहें। इसके लिए उनके खान-पान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। खासकर, यह जानना जरूरी है कि उन्हें क्या नहीं खिलाना चाहिए।
पशुओं को न दें यह चारा
गाय-भैंसों की अच्छी सेहत के लिए हरा चारा खिलाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह उनके पाचन और दूध उत्पादन के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इससे उनकी प्रजनन क्षमता भी बढ़ती है। लेकिन कुछ हरे चारे ऐसे भी होते हैं जो पशुओं के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
- दलहनी फसलों वाला हरा चारा अधिक मात्रा में नहीं खिलाना चाहिए।
- नमी युक्त हरा चारा पशुओं को नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि इसमें फफूंद और कीट लगने का खतरा रहता है, जिससे उनके पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है।
हरा चारा खिलाने का सही तरीका
हरा चारा जितना फायदेमंद है, उतना ही जरूरी इसे सही तरीके से खिलाना भी है।
- पशुओं को रोजाना 15 किलो से अधिक हरा चारा न दें।
- सीधे हरा चारा न खिलाएं, बल्कि इसे भूसे के साथ मिलाकर देना चाहिए।
- हरे चारे के साथ सूखा चारा और प्रति पशु कम से कम दो किलो अनाज भी आवश्यक रूप से खिलाएं।
मौसम के अनुसार कौन-सा चारा खिलाएं?
पशुओं के लिए एक ही प्रकार का चारा पूरे साल फायदेमंद नहीं होता। हर मौसम में अलग-अलग प्रकार के चारे का उपयोग करना चाहिए।
- नवंबर से फरवरी: बरसीम चारा उपयुक्त होता है।
- गर्मी के दिनों में: चरी खिलाई जा सकती है।
- बारिश के मौसम में: मक्का और बाजरे के पत्ते उपयुक्त होते हैं।
- जब ताजा चारा उपलब्ध न हो: ऐसे समय में साइलेज सबसे अच्छा विकल्प होता है।
पशुपालकों के लिए सही चारे का चुनाव करना बेहद जरूरी है, ताकि उनके पशु स्वस्थ रहें और बेहतर उत्पादन दें।
